Lafadz Adzan tatkala hujan: SHALLUU FIRRIHAAL (Hendaklah kalian shalat dirumah masing-masing)
Imam Bukhari : 628
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ صَاحِبُ الزِّيَادِيِّ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ الْحَارِثِ قَالَ خَطَبَنَا ابْنُ عَبَّاسٍفِي يَوْمٍ ذِي رَدْغٍ فَأَمَرَ الْمُؤَذِّنَ لَمَّا بَلَغَ حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ قَالَ قُلْ الصَّلَاةُ فِي الرِّحَالِ فَنَظَرَ بَعْضُهُمْ إِلَى بَعْضٍ فَكَأَنَّهُمْ أَنْكَرُوا فَقَالَ كَأَنَّكُمْ أَنْكَرْتُمْ هَذَا إِنَّ هَذَا فَعَلَهُ مَنْ هُوَ خَيْرٌ مِنِّي يَعْنِي النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّهَا عَزْمَةٌ وَإِنِّي كَرِهْتُ أَنْ أُحْرِجَكُمْوَعَنْ حَمَّادٍ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَارِثِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ نَحْوَهُ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ كَرِهْتُ أَنْ أُؤَثِّمَكُمْ فَتَجِيئُونَ تَدُوسُونَ الطِّينَ إِلَى رُكَبِكُمْ
हमसे कहिन [अब्दुल्ला बिन अब्दुल वहाब] कहिन, हमसे कहिन [हम्मद बिन जैद] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल हमीद] अपने दोस्त अज़ जायदी, उ कहिन, हम [अब्दुल्ला बिन अल हरिथ] का कहत सुने रहेन, 'एक दिन जब बारिश के कारण सड़क पानी अऊर कीचड़ से भरी रही, [इब्ब अब्बास] हमका एक उपदेश दिहिन। जब मुआज़िन ने कहा 'हय्या 'अलाशशलाह' - आओ नमाज पढ़ो - तो उन्होंने उन्हें आदेश दिया कि कहें: 'अपने-अपने घर में नमाज करो'। यहिसे लोग एक दूसरे का अइसे देखत रहें जइसे कि उ लोग इनकार करत होंय। तो इब्न अब्बास ने कहा कि मानो आप इस समस्या से इनकार कर रहे हो। दरअसल, ई तरह के काम हमसे बढ़िया केहू द्वारा कीन गा रहा, यानी पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। अऊर वाकई ई एक दायित्व है -'अजीमह- अऊर मैं तोहरे सामने ईका प्रकट करै मा संकोच करत हउँ'। अऊर [हम्मद] से [अशिम] से [अब्दुल्लाह बिन अल हरिथ] से [इब्न अब्बास] से वइसने। हालांकि, उ इहो कहिन कि इब्न अब्बास कहिन, 'मैं तोहका पाप नाहीं करावइ चाहत हउँ, तू नमाज मा आवत हौ जब तोहार घुटना कीचड़ से भरा अहै'।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 2373, 4248, 4352, 4904, 5050, 5538, 13827, 13979, 14742, 14886, 16870, 17254, 18266, 19234, 19294, 19311, 19780, 19781, 19782, 19783, 19785, 19788, 19790, 19792, 19795, 22059, 22085
Imam Bukhari : 581, 596, 626, 628, 850
Imam Muslim : 1125, 1126, 1127, 1128
Imam Abu Dawud : 893, 894, 895, 896, 897, 898, 899, 900
Imam Tirmidzi : 374
Imam Nasa'i : 647, 648, 845
Imam Ibnu Majah : 926, 927, 928, 929
Imam Malik : 143