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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Bukhari : 6689

حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عُمَرَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ عَنْ حَبِيبٍ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَكُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَبَّيْنَا بِالْحَجِّ وَقَدِمْنَا مَكَّةَ لِأَرْبَعٍ خَلَوْنَ مِنْ ذِي الْحِجَّةِ فَأَمَرَنَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ نَطُوفَ بِالْبَيْتِ وَبِالصَّفَا وَالْمَرْوَةِ وَأَنْ نَجْعَلَهَا عُمْرَةً وَنَحِلَّ إِلَّا مَنْ كَانَ مَعَهُ هَدْيٌ قَالَ وَلَمْ يَكُنْ مَعَ أَحَدٍ مِنَّا هَدْيٌ غَيْرَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَطَلْحَةَ وَجَاءَ عَلِيٌّ مِنْ الْيَمَنِ مَعَهُ الْهَدْيُ فَقَالَ أَهْلَلْتُ بِمَا أَهَلَّ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالُوا نَنْطَلِقُ إِلَى مِنًى وَذَكَرُ أَحَدِنَا يَقْطُرُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَوْ اسْتَقْبَلْتُ مِنْ أَمْرِي مَا اسْتَدْبَرْتُ مَا أَهْدَيْتُ وَلَوْلَا أَنَّ مَعِي الْهَدْيَ لَحَلَلْتُ قَالَ وَلَقِيَهُ سُرَاقَةُ وَهُوَ يَرْمِي جَمْرَةَ الْعَقَبَةِ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلَنَا هَذِهِ خَاصَّةً قَالَ لَا بَلْ لِأَبَدٍ قَالَ وَكَانَتْ عَائِشَةُ قَدِمَتْ مَعَهُ مَكَّةَ وَهِيَ حَائِضٌ فَأَمَرَهَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ تَنْسُكَ الْمَنَاسِكَ كُلَّهَا غَيْرَ أَنَّهَا لَا تَطُوفُ وَلَا تُصَلِّي حَتَّى تَطْهُرَ فَلَمَّا نَزَلُوا الْبَطْحَاءَ قَالَتْ عَائِشَةُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَتَنْطَلِقُونَ بِحَجَّةٍ وَعُمْرَةٍ وَأَنْطَلِقُ بِحَجَّةٍ قَالَ ثُمَّ أَمَرَ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ أَنْ يَنْطَلِقَ مَعَهَا إِلَى التَّنْعِيمِ فَاعْتَمَرَتْ عُمْرَةً فِي ذِي الْحَجَّةِ بَعْدَ أَيَّامِ الْحَجِّ

हमसे कहिन है [अल हसन बिन उमर] हमसे [यजीद] से [हबीब] से ['अथो`] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला] कहिन हैं; 'हम रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथ रहेन, फिर हम हज के लिए तलबिया के आपन इरादा कहिन, जब हम धूल हिज्जा के चौथी तारीख का मक्का पहुँचेन, तौ पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम हमका बैतुल्लाह मा तवाफ करै का आदेश दिहिन अऊर शफा मा -साई- करौ अऊर हम उमराह करौ, तौ हम तौ सिवाय ओनके जे पहिले से ही बलिदान लइके आए रहे'। जाबिर कहिन; 'अऊर हममें से कौनो भी पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम अऊर तोल्हा के अलावा बलि के जानवर नाहीं लाया। अली यमन से बलि पशु लेकर आए, फिर बोला; 'मैं आपन इरादा वइसने कहत हउँ जइसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इरादा किहिन रहैं'। मित्र कहिन; 'हम जा रहे हैं मीना, जबकि हममें से एक के जननांग से वीर्य टपक रहा है'। तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा; 'अगर मैं जो बीत गवा है, ओका दोहरा सकत रहौं, तौ मैं बलि का वध न करित, अगर बलि के पशु न लावत, तौ मैं बच जात'। जाबिर कहिन; तब सूरकाह उनसे मिले जो उस समय अकबा तीर्थयात्रा फेंक रहे थे, उन्होंने कहा; 'हे अल्लाह के रसूल, का ई तरह के उमरा हमरे लिए खास है?' पैगम्बर जवाब दिहिन: 'नहीं, हमेशा के लिए भी नाहीं'। जाबिर कहिन; 'अऊर ऐसिया अऊर उ मासिक धर्म के दौरान मक्का पहुँचे, यहिसे पैगम्बर ने ओनका सब अनुष्ठान करै का आदेश दिहिन सिवाय ई कि जब तक उ शुद्ध न होइ तब तक उ तवाफ न करै अऊर नमाज न पढ़ै। जब उइ बथहा` मा रुके रहे, तौ ऐसिया कहिन; 'हे रसूल अल्लाह, का तुम हज अऊर उमरा के लिए गये रहेव जब कि मैं सिर्फ हज के लिए गय रहेव?' जाबीर आगे कहिन; फिर रसूलुल्लाह ने अब्दुर्रहमान बिन अबू बकर का सिद्दीक के रूप मा अपने साथ तानीम जाय का आदेश दिहिन, अऊर ऐसिया ने हज के दिनन के भीतर, ज़ुल्हिजह के महीना मा उमरा किहिन।