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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Bukhari : 6674

حَدَّثَنَا مَحْمُودٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُبَايِعُ النِّسَاءَ بِالْكَلَامِ بِهَذِهِ الْآيَةِ{ لَا يُشْرِكْنَ بِاللَّهِ شَيْئًا }قَالَتْ وَمَا مَسَّتْ يَدُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَدَ امْرَأَةٍ إِلَّا امْرَأَةً يَمْلِكُهَا

हमसे कहिस है [महमूद] हमसे कहिस है [अब्दुर्राजाक] हमसे कहिस है [ममर] से [अज जुहरी] से [उर्वाह] से [ऐस्याह] रदलियाहु अन्हा, कहत है, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शाल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने महिलाओं के साथ मौखिक रूप से निष्ठा रखी - ई हाथ से शमशान नाहीं; 'कउनो चीज से अल्लाह के साथ साथी न जोड़ब...'। अंत तक -क्यूएस। अल्मुमतंगनाह 12- ऐसियाह कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हाथ ओनके पास रही - ओनके पत्नी - के अलावा दूसर औरत का कभी नाहीं छुए।