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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 16153

قَالَ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ قَالَ فَذَكَرَ مُحَمَّدُ بْنُ مُسْلِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ شِهَابٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ عَنْ أَبِيهِ جُبَيْرٍ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ يَخْطُبُ النَّاسَ بِالْخَيْفِ نَضَّرَ اللَّهُ عَبْدًا سَمِعَ مَقَالَتِي فَوَعَاهَا ثُمَّ أَدَّاهَا لِمَنْ لَمْ يَسْمَعْهَا فَرُبَّ حَامِلِ فِقْهٍ لَا فِقْهَ لَهُ وَرُبَّ حَامِلِ فِقْهٍ إِلَى مَنْ هُوَ أَفْقَهُ مِنْهُ ثَلَاثٌ لَا يَغِلُّ عَلَيْهِنَّ قَلْبُ الْمُؤْمِنِ إِخْلَاصُ الْعَمَلِ وَطَاعَةُ ذَوِي الْأَمْرِ وَلُزُومُ الْجَمَاعَةِ فَإِنَّ دَعْوَتَهُمْ تَكُونُ مِنْ وَرَائِهِ و عَنْ ابْنِ إِسْحَاقَ قَالَ حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ أَبِي عَمْرٍو مَوْلَى الْمُطَّلِبِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ مُطْعِمٍ عَنْ أَبِيهِ مِثْلَ حَدِيثِ ابْنِ شِهَابٍ لَمْ يَزِدْ وَلَمْ يَنْقُصْ

-अहमद बिन हनबल रदलियाल्लाहुअनहु- कहिन; हमसे कहिस है [जकूब] कहिन; हमका [मेरे पिता] से [इब्न इशाक] कहिन; तब [मुहम्मद बिन मुस्लिम बिन 'उबैदुल्लाह बिन शिहाब] [मुहम्मद बिन जुबैर बिन मुथ'िम] से [अपने पिता] ने कहा; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का खैफ मा लोगन का उपदेश देत सुने हई कि 'अल्लाह एक नौकर का पद मा उठाई जे मोर बात सुनि लेई अऊर फिर उ ओनके रखवाली करिहैं, फिर ओन लोगन तक पहुँचाइहैं जे ओनके बातन का नाहीं सुनिन हैं।' हो सकत है कि हदीस लावै वाले का समझ मा न आवै, हो सकत है कि हदीस लावै वाले कउनौ बेहतर समझै वाले तक पहुँचाये होंय। तीन चीजें हैं जेहिसे एक आस्तिक के दिल ईर्ष्या नाहीं करि: अच्छा काम करै मा ईमानदार होब, नेता के बात मानब अऊर मंडली के सेवा करब। सचमुच, ओनके प्रार्थना ओकरे पीछे होई। [इब्न इशाक] से कहा; इब्न शिहाब के हदीस के अनुसार [अब्दुर्रहमान बिन अल हुवरैट्स] से [अब्दुर्रहमान बिन अल हुवरैट्स] से [उनके पिता] से [अम्र बिन अबू अमर] अल मुथल्लिब के गुलाम इब्न शिहाब के हदीस के अनुसार बिना जरा भी जोड़ या घटाव के बताइस है।