Larangan isbal dalam shalat: tidak diterimanya shalat karena isbal (memanjangkan kain atau sarungnya sampai dibawah mata kaki)
Imam Ahmad : 16033
قَالَ حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَ حَدَّثَنَا أَبَانُ وَعَبْدُ الصَّمَدِ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ عَنْ يَحْيَى عَنْ أَبِي جَعْفَرٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ بَعْضِ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ بَيْنَمَا رَجُلٌ يُصَلِّي وَهُوَ مُسْبِلٌ إِزَارَهُ إِذْ قَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اذْهَبْ فَتَوَضَّأْ قَالَ فَذَهَبَ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ جَاءَ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اذْهَبْ فَتَوَضَّأْ قَالَ فَذَهَبَ فَتَوَضَّأَ ثُمَّ جَاءَ فَقَالَ مَا لَكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا لَكَ أَمَرْتَهُ يَتَوَضَّأُ ثُمَّ سَكَتَّ قَالَ إِنَّهُ كَانَ يُصَلِّي وَهُوَ مُسْبِلٌ إِزَارَهُ وَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ لَا يَقْبَلُ صَلَاةَ عَبْدٍ مُسْبِلٍ إِزَارَهُ
-अहमद बिन हनबल रदलियाल्लाहुअनहु- कहिन; हमसे कहिन है [यूनुस बिन मुहम्मद] कहिन; हमका [अबन] बताइस है अऊर [अब्दुशशोमद] कहिन; हमका [हिस्याम] से [यह्या] से [अबू जाफर] से [अथा बिन यासर] से [पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के कुछ साथियन] से कहिन है; जब कोई इस्बाल मा नमाज पढ़त रहा - आपन कपड़ा टखनन तक नीचे फैलाये - अपने सरोंग पर, रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ओसे कहिन, 'जा अऊर वजू करा'। -कुछ मित्र रदलियाल्लाहुअनहुम- कहिन; तब व्यक्ति गये औ वजू, फिरि आय॥ तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा कि जा वजू कर ले। -कुछ मित्र रदलियाल्लाहुअनहुम- कहिन; तब जाके मोर वुडल किहिन, फिर आइन। तब - कुछ दोस्तों रदलियाल्लाहुअनहुम - ने पूछा, तुम काहे हे अल्लाह के रसूल, तुमने उन्हें वजू लेने का आदेश काहे दिया और फिर तुम चुप रहे? उ जवाब दिहिन, 'वह मुसबिल सारोंग पहिन के नमाज पढ़त है, दरअसल अल्लाह अज्जा वा जल्ला एक नौकर के नमाज स्वीकार नाहीं करत है जेकर सारोंग इस्बल है'।