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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Keutamaan Shalat Berjama'ah 25 derajat

Imam Bukhari : 611

حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ قَالَ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ قَالَ سَمِعْتُ أَبَا صَالِحٍ يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاةُ الرَّجُلِ فِي الْجَمَاعَةِ تُضَعَّفُ عَلَى صَلَاتِهِ فِي بَيْتِهِ وَفِي سُوقِهِ خَمْسًا وَعِشْرِينَ ضِعْفًا وَذَلِكَ أَنَّهُ إِذَا تَوَضَّأَ فَأَحْسَنَ الْوُضُوءَ ثُمَّ خَرَجَ إِلَى الْمَسْجِدِ لَا يُخْرِجُهُ إِلَّا الصَّلَاةُ لَمْ يَخْطُ خَطْوَةً إِلَّا رُفِعَتْ لَهُ بِهَا دَرَجَةٌ وَحُطَّ عَنْهُ بِهَا خَطِيئَةٌ فَإِذَا صَلَّى لَمْ تَزَلْ الْمَلَائِكَةُ تُصَلِّي عَلَيْهِ مَا دَامَ فِي مُصَلَّاهُ اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَيْهِ اللَّهُمَّ ارْحَمْهُ وَلَا يَزَالُ أَحَدُكُمْ فِي صَلَاةٍ مَا انْتَظَرَ الصَّلَاةَ

हमका बतावा गा है [मूसा बिन इस्माइल] कहिन, हमसे बतावा गा है [अब्दुल वाहिद] कहिन, हमसे बतावा गा है [अल अमासी] कहिन, हम [अबू सालिह] का कहत सुने रहेन, हम [अबू हुरैराह] का कहत सुने रहेन: 'अल्लाह के रसूल (अल्लाह के रसूल अलैहि वसल्लम) ने अपने घर के नमाज के तुलना मा कहा:' अथवा बजार मा बड़ा है - गुणा - इनाम पच्चीस गुना है। ई एहसे अहै काहे से कि अगर उ आपन वजू पूरा कइके वजू करै अऊर फिर अपने घर से बाहर मस्जिद जात है, तौ उ जमात के नमाज पढ़ै के अलावा बाहर नाहीं जात है, तौ ओकरे कदम मा एकौ कदम नाहीं है सिवाय यहिके कि ऊ एक डिग्री से बढ़ि जाई, अऊर ओकर एक गलती मिट जाई। जब उ नमाज पढ़िहैं तौ एक दूत उनके लिए नमाज पढ़ै उतरिहैं जब उ नमाज के जगह मा होइहैं, 'हे अल्लाह ओका माफ करौ। हे अल्लाह, ओकरे ऊपर रहम करा'। अऊर तुममें से एक हमेशा प्रार्थना के स्थिति मा गिना जात है जब तक कि ऊ प्रार्थना के पढ़े के इंतजार करत है'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 3386, 3943, 3944, 4096, 4201, 6888, 7268, 7294, 7370, 8786, 9738, 9769, 9914, 10100, 10325, 10379, 10422, 11095, 11103, 23088
Imam Bukhari : 457, 610, 611, 612, 1976
Imam Muslim : 1034, 1035, 1036, 1037
Imam Abu Dawud : 472
Imam Tirmidzi : 200
Imam Nasa'i : 482, 829, 830
Imam Ibnu Majah : 778, 779, 780, 782, 1403
Imam Malik : 265
Imam Darimi : 1245