Imam Ahmad : 15253
وَأَصَابَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهْبًا فَنَدَّ بَعِيرٌ مِنْهَا فَسَعَوْا فَلَمْ يَسْتَطِيعُوهُ فَرَمَاهُ رَجُلٌ مِنْ الْقَوْمِ بِسَهْمٍ فَحَبَسَهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ لِهَذِهِ الْإِبِلِ أَوْ النَّعَمِ أَوَابِدَ كَأَوَابِدِ الْوَحْشِ فَإِذَا غَلَبَكُمْ شَيْءٌ مِنْهَا فَاصْنَعُوا بِهِ هَكَذَا
अबहियों [रफी' बिन खुदाईज] से पिछली हदीस के समान संचरण मार्ग से; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को लूट मिली लेकिन उनका ऊँट भाग गया, भगाया लेकिन न पाई केहू ओनके ऊपर तीर फेंकिस अऊर ऊ ओनके ऊपर लाग। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'ई ऊँट', या 'ई पशुधन मा जंगली जानवरन के तरह जंगली गुण हैं।' अगर आपका कुछ अइसन सामना होत है तौ वहिके साथ वइसने व्यवहार करा'।