Imam Ahmad : 14977
قَالَ قُرِئَ عَلَى يَعْقُوبَ فِي مَغَازِي أَبِيهِ عَنِ ابْنِ إِسْحَاقَ قَالَ ابْنُ إِسْحَاقَ وَحَدَّثَنِي بُرَيْدَةُ بْنُ سُفْيَانَ الْأَسْلَمِيُّ عَنْ بَعْضِ رِجَالِ بَنِي سَلِمَةَ عَنْ أَبِي الْيَسَرِ كَعْبِ بْنِ عَمْرٍو قَالَ قَالَ وَاللَّهِ إِنَّا لَمَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِخَيْبَرَ عَشِيَّةً إِذْ أَقْبَلَتْ غَنَمٌ لِرَجُلٍ مِنْ يَهُودَ تُرِيدُ حِصْنَهُمْ وَنَحْنُ مُحَاصِرُوهُمْ إِذْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ رَجُلٌ يُطْعِمُنَا مِنْ هَذِهِ الْغَنَمِ قَالَ أَبُو الْيَسَرِ فَقُلْتُ أَنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ فَافْعَلْ قَالَ فَخَرَجْتُ أَشْتَدُّ مِثْلَ الظَّلِيمِ فَلَمَّا نَظَرَ إِلَيَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُوَلِّيًا قَالَ اللَّهُمَّ أَمْتِعْنَا بِهِ قَالَ فَأَدْرَكْتُ الْغَنَمَ وَقَدْ دَخَلَتْ أَوَائِلُهَا الْحِصْنَ فَأَخَذْتُ شَاتَيْنِ مِنْ أُخْرَاهَا فَاحْتَضَنْتُهُمَا تَحْتَ يَدَيَّ ثُمَّ أَقْبَلْتُ بِهِمَا أَشْتَدُّ كَأَنَّهُ لَيْسَ مَعِي شَيْءٌ حَتَّى أَلْقَيْتُهُمَا عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَبَحُوهُمَا فَأَكَلُوهُمَا فَكَانَ أَبُو الْيَسَرِ مِنْ آخِرِ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَلَاكًا فَكَانَ إِذَا حَدَّثَ بِهَذَا الْحَدِيثِ بَكَى ثُمَّ يَقُولُ أُمْتِعُوا بِي لَعَمْرِي كُنْتُ آخِرَهُمْ
-अहमद बिन हंबल आरएच- कहिन; [याकूब] के सामने अपने पिता के युद्ध पुस्तक से, [इब्न इशाक] से पढ़ा। इब्न इशाक कहिन; अऊर [बुरैदह बिन सुफयान अल असलमी] से [बनी सलामा के कुछ लोग] से [अबू अल यासर का'ब बिन अमर] से कहिन हैं; अल्लाह के कसम, हम दरअसल दुपहरिया मा खैबर मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे रहेन, जब एक यहूदी के बकरियन के झुंड रहा, जे ओनके किला के ओर जात रहा, जबकि हम ओनका घेर लिहे रहेन। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'हमका बकरी से खाना कौन लेई' अबू अल यासर कहिन; मैं हे अल्लाह के रसूल, उ कहिन: 'करो!' -अबू अल यासर रदलियाल्लाहुअनहु- कहिन; फिर मैं रात के अंधेरे मा बाहर निकला, जब रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने मोका जाने वाला देखिन, तौ उ प्रार्थना किहिन, हे अल्लाह, हमका यहिसे खुश करा। -अबू अल यासर रदलियाल्लाहुअनहु- कहिन; हमका एक बकरी मिली अऊर पता चला कि ओमे से कुछ किला मा घुस गवा रहा, फिर हम बाकी दुई बकरियन का लइ लिहेन, फिर हम ओनका अपने हाथ के नीचे रख लिहेन, फिर हम ओनका लइ गयेन काहे से कि हम चिंतित रहेन मानो हम कुछौ नाहीं लाए रहेन जब तक हम ओनका पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने नाहीं लायेन। फिर वध किहिन, फिर खाइ लिहिन'। अबू अल यासर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दोस्तन में से एक रहे जे आखिरी मरे रहे, जब उ ई हदीस सुनाइन, त उ रोए अऊर कहिन; उइ मोसे प्रसन्न रहे हैं अऊर मैं ओनमा से आखिरी हउँ।