Imam Ahmad : 14953
حَدَّثَنَا أَسْوَدُ بْنُ عَامِرٍ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ إِبْرَاهِيمَ يَعْنِي ابْنَ مُهَاجِرٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنِ السَّائِبِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ جِيءَ بِي إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ فَتْحِ مَكَّةَ جَاءَ بِي عُثْمَانُ بْنُ عَفَّانَ وَزُهَيْرٌ فَجَعَلُوا يَثْنُونَ عَلَيْهِ فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تُعْلِمُونِي بِهِ قَدْ كَانَ صَاحِبِي فِي الْجَاهِلِيَّةِ قَالَ قَالَ نَعَمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَنِعْمَ الصَّاحِبُ كُنْتَ قَالَ فَقَالَ يَا سَائِبُ انْظُرْ أَخْلَاقَكَ الَّتِي كُنْتَ تَصْنَعُهَا فِي الْجَاهِلِيَّةِ فَاجْعَلْهَا فِي الْإِسْلَامِ أَقْرِ الضَّيْفَ وَأَكْرِمْ الْيَتِيمَ وَأَحْسِنْ إِلَى جَارِكَ
हमसे कहिन है [असवाद बिन अमीर] हमसे [इस्रोएल] से [इब्राहिम] अर्थात् इब्न मुहाजिर, [मुजाहिद] से [अस-सैब बिन अब्दुल्ला] कहिन हैं; मोका पैगम्बर शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के सामने लाया गा रहा अऊर मोर साथ उस्मान बिन अफ्फान अऊर जुहैर, तौ उइ -रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम- के तारीफ किहिन- फिर रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ओनसे कहिन, तुमका उनके बारे मा बतावै के जरूरत नाहीं है -अस-सैब, जयहिल मा मोर दोस्त रहे। -मुजाहिद रदलियाल्लाहुअन्हु- कहिन; अस-साइब कहिन; हाँ, हे अल्लाह के रसूल! सबसे अच्छा दोस्त तुम हो। -रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- ने कहा: 'हे साईब, जाहिलिया काल में आपने जो नैतिकता की है, वह देखो, फिर इस्लाम में इन -नैतिकताओं- को करो; मेहमानन का सम्मान करा अऊर अनाथन का सम्मान करा अऊर अपने पड़ोसियन के साथ दयालु रहा।