Katakanlah, saya beriman kepada Allah, lalu beristiqomahlah
Imam Ahmad : 14869حَدَّثَنَا وَكِيعٌ وَأَبُو مُعَاوِيَةَ قَالَا حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ سُفْيَانَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الثَّقَفِيِّ قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قُلْ لِي فِي الْإِسْلَامِ قَوْلًا لَا أَسْأَلُ عَنْهُ أَحَدًا غَيْرَكَ قَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ بَعْدَكَ قَالَ قُلْ آمَنْتُ بِاللَّهِ ثُمَّ اسْتَقِمْ
हमरा सभकेँ [वाकी’] कहि देने अछि आ [अबू मुअवियाह] कहलनि; हमरा सभकेँ [हिस्यम बिन उर्वाह] [अपन पिता]सँ [सुफयान बिन अब्दुल्लाह अतस-त्साकोफी]सँ कहने छथि; हम कहलियनि; हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, हमरा इस्लाम में एकटा शब्द बताउ, जे हमरा अहाँ के अलावा ककरो स पूछय के जरूरत नै अछि। अबू मुअवियाह कहलनि; 'अहाँक बाद' ओ कहलनि: 'कहू, हम अल्लाह पर विश्वास करैत छी, तखन स्टीकोमा बनाउ'।