Imam Ahmad : 14483
حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ هِشَامٍ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ أَكْلِ الْبَصَلِ وَالْكُرَّاثِ فَغَلَبَتْنَا الْحَاجَةُ فَأَكَلْنَا مِنْهُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ أَكَلَ مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ الْمُنْتِنَةِ فَلَا يَقْرَبَنَّ مَسْجِدَنَا فَإِنَّ الْمَلَائِكَةَ تَتَأَذَّى مِمَّا يَتَأَذَّى مِنْهُ الْإِنْسُ
हमका [कत्सिर बिन हिस्याम] से [हिस्याम] से [अबू अज जुबैर] से [जाबीर रदलियाल्लाहु'अन्हु] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने प्याज लहसुन खाने पर रोक लगाई। यहिसे हम जरूरत से तब तक दबावा जात रहेन जब तक कि हम ओका नाहीं खात रहेन जब तक कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे ई महक वाला पेड़ खात है, हमरे मस्जिद के पास कभी न आवै, काहे से कि स्वर्गदूत ओन चीजन से परेशान होत हैं जवन मनुष्यन का यहिसे परेशान महसूस करावत हैं'।