Imam Ahmad : 14272
حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا أَنْبَأَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ وَحُسَيْنُ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ عَنْ جَابِرٍ قَالَ بَيْنَمَا نَحْنُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي صُفُوفِنَا فِي الصَّلَاةِ صَلَاةِ الظُّهْرِ أَوْ الْعَصْرِ فَإِذَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَنَاوَلُ شَيْئًا ثُمَّ تَأَخَّرَ فَتَأَخَّرَ النَّاسُ فَلَمَّا قَضَى الصَّلَاةَ قَالَ لَهُ أُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ شَيْئًا صَنَعْتَهُ فِي الصَّلَاةِ لَمْ تَكُنْ تَصْنَعُهُ قَالَ عُرِضَتْ عَلَيَّ الْجَنَّةُ بِمَا فِيهَا مِنْ الزَّهْرَةِ وَالنَّضْرَةِ فَتَنَاوَلْتُ مِنْهَا قِطْفًا مِنْ عِنَبٍ لِآتِيَكُمْ بِهِ فَحِيلَ بَيْنِي وَبَيْنَهُ وَلَوْ أَتَيْتُكُمْ بِهِ لَأَكَلَ مِنْهُ مَنْ بَيْنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ لَا يُنْقِصُونَهُ شَيْئًا ثُمَّ عُرِضَتْ عَلَيَّ النَّارُ فَلَمَّا وَجَدْتُ سَفْعَهَا تَأَخَّرْتُ عَنْهَا وَأَكْثَرُ مَنْ رَأَيْتُ فِيهَا النِّسَاءُ اللَّاتِي إِنْ اؤْتُمِنَّ أَفْشَيْنَ وَإِنْ يُسْأَلْنَ بَخِلْنَ وَإِنْ يَسْأَلْنَ أَلْحَفْنَ قَالَ حُسَيْنٌ وَإِنْ أُعْطِينَ لَمْ يَشْكُرْنَ وَرَأَيْتُ فِيهَا لُحَيَّ بْنَ عَمْرٍو يَجُرُّ قُصْبَهُ فِي النَّارِ وَأَشْبَهُ مَنْ رَأَيْتُ بِهِ مَعْبَدُ بْنُ أَكْثَمَ الْكَعْبِيُّ قَالَ مَعْبَدٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيُخْشَى عَلَيَّ مِنْ شَبَهِهِ وَهُوَ وَالِدٌ فَقَالَ لَا أَنْتَ مُؤْمِنٌ وَهُوَ كَافِرٌ قَالَ حُسَيْنٌ وَكَانَ أَوَّلَ مَنْ حَمَلَ الْعَرَبَ عَلَى عِبَادَةِ الْأَوْثَانِ قَالَ حُسَيْنٌ تَأَخَّرْتُ عَنْهَا وَلَوْلَا ذَلِكَ لَغَشِيَتْكُمْ
हमसे कहिन है [जकारिया] हमसे कहिन हैं ['उबैदुल्लोह] अऊर [हुसैन बिन मुहम्मद] कहिन हैं; हमका बताइस है ['उबैदुल्लोह] से [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद बिन 'अकील] से [जाबिर] कहिन; जब हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे दुपहरिया या असर के नमाज के लाइन मा रहेन, त अचानक लाग कि उ कुछ नोटिस किहिन हैं, फिर उ पीछे हट गए अऊर उ लोग भी पीछे हट गए। नमाज समाप्त हुई तो उबय बिन काब ने कहा; आप आमतौर पर जइसे प्रार्थना करत हई, वइसे काहे नाहीं करत हई? -रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- कहिन: 'स्वर्ग का फूल अऊर भोग के रूप मा ओकर सब सामग्री के साथे देखावा गा रहा, फिर हम ओसे एक अंगूर खाये रहेन, हम तोहरे पास लावै चाहत रहेन लेकिन ई असंभव रहा। अगर मैं तोहरे बरे लइ आवत रहित तौ आकाश-पृथ्वी के लोगन के खाये खातिर काफी होत, बिना जरा भी नुकसान के। फिर मोका नरक देखावा गा, जइसे ही मोका गर्मी मिली, मैं वहिसे पीछे हट गय, जवन मैं सबसे ज्यादा देखिन वहिमा औरत रहीं, काहे से कि अगर ओनका संदेश दीन जात तौ उ ओका आगे बढ़ावत, अगर ओनसे पूछा जात तौ उ अभद्र होत अऊर अगर उ पूछत तौ उ हमेशा मांग करत। हुसैन कहिन -अपने इतिहास मा-, अगर ओनका दीन जात, तौ उ आभारी नाहीं होत। हमने लुहाय बिन अम्र का वहाँ अपनी आंतों को घसीटते हुए देखा, और हमने उनसे सबसे ज्यादा मिलता-जुलता व्यक्ति मा'बाद बिन अकत्साम अल काबी को देखा। मा'बाद कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल, का मैं सिर्फ एहसे चिंतित हउँ कि मैं ओनके जइसन दिखत हउँ भले ही उ एक बूढ़ा आदमी अहै?' -रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- ने कहा: 'नहीं तुम मोमिन हो जबकि वह काफिर है'। हुसैन कहिन; -लुहाय बिन 'अम्र- अरबन का मूर्तियन के पूजा करै के लिए आमंत्रित करै वाले पहिला व्यक्ति रहे। हुसैन कहिन - अपने इतिहास मा - - संपादकीय के साथ - 'त हम यहिसे हट गयेन - नरक के आग -, नाहीं तौ आग तोहका जरूर जला देई'।