Imam Ahmad : 14258
حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَبِي الْمُتَوَكِّلِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَصْحَابَهُ مَرُّوا بِامْرَأَةٍ فَذَبَحَتْ لَهُمْ شَاةً وَاتَّخَذَتْ لَهُمْ طَعَامًا فَلَمَّا رَجَعَ قَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّا اتَّخَذْنَا لَكُمْ طَعَامًا فَادْخُلُوا فَكُلُوا فَدَخَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَصْحَابُهُ وَكَانُوا لَا يَبْدَءُونَ حَتَّى يَبْتَدِئَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخَذَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لُقْمَةً فَلَمْ يَسْتَطِعْ أَنْ يُسِيغَهَا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَذِهِ شَاةٌ ذُبِحَتْ بِغَيْرِ إِذْنِ أَهْلِهَا فَقَالَتْ الْمَرْأَةُ يَا نَبِيَّ اللَّهِ إِنَّا لَا نَحْتَشِمُ مِنْ آلِ سَعْدِ بْنِ مُعَاذٍ وَلَا يَحْتَشِمُونَ مِنَّا نَأْخُذُ مِنْهُمْ وَيَأْخُذُونَ مِنَّا
हमसे कहिन है [अब्दुशशमद] हमसे कहिन है [हम्मद] से [हुमैद] से [अबू अल मुतवक्किल] से [जाबिर], रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अऊर उनके साथी एक औरत के पास से गुजरिन, फिर उ एक बकरी का काटिन अऊर उनके लिए भोजन बनाइन। जब -रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- आए तो महिला ने कहा; हे अल्लाह के रसूल! हम आपके लिए खाना बनाये हैं, कृपया आकर खाये ! तब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अऊर उनके साथी आए अऊर उ - रदलियाल्लाहुअहुमा के साथी - तब तक शुरू नाहीं किहिन जब तक कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पहिले शुरू नाहीं किहिन। पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक काट लिया लेकिन निगल नहीं पाए, फिर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'ई एक बकरी है जेका मालिक के इजाजत के बिना काट दीन गा रहा', औरत कहिन; हे नबीयूल्लाह, हमका सद बिन मुआज़ के परिवार से शर्म नाहीं आवत है अऊर ओनका भी हमसे शर्म नाहीं है, हम ओनके संपत्ति लेत रहेन अऊर उ हमार भी लेत रहे'।