Imam Ahmad : 14246
حَدَّثَنَا حُجَيْنٌ وَيُونُسُ قَالَا حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّهُ قَالَ رُمِيَ يَوْمَ الْأَحْزَابِ سَعْدُ بْنُ مُعَاذٍ فَقَطَعُوا أَكْحَلَهُ فَحَسَمَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالنَّارِ فَانْتَفَخَتْ يَدُهُ فَحَسَمَهُ فَانْتَفَخَتْ يَدُهُ فَحَسَمَهُ أُخْرَى فَانْتَفَخَتْ يَدُهُ فَنَزَفَهُ فَلَمَّا رَأَى ذَلِكَ قَالَ اللَّهُمَّ لَا تُخْرِجْ نَفْسِي حَتَّى تُقِرَّ عَيْنِي مِنْ بَنِي قُرَيْظَةَ فَاسْتَمْسَكَ عِرْقُهُ فَمَا قَطَرَ قَطْرَةً حَتَّى نَزَلُوا عَلَى حُكْمِ سَعْدٍ فَأُرْسِلَ إِلَيْهِ فَحَكَمَ أَنْ تُقْتَلَ رِجَالُهُمْ وَيُسْتَحْيَا نِسَاؤُهُمْ وَذَرَارِيُّهُمْ لِيَسْتَعِينَ بِهِمْ الْمُسْلِمُونَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَصَبْتَ حُكْمَ اللَّهِ فِيهِمْ وَكَانُوا أَرْبَعَ مِائَةٍ فَلَمَّا فُرِغَ مِنْ قَتْلِهِمْ انْفَتَقَ عِرْقُهُ فَمَاتَ
हमसे [हुजैन] अऊर [यूनुस] कहिन; हमका [अल लैट्स बिन सद] से [अबू अज़ जुबैर] से [जाबिर] से कहिन है, वाकई उ कहिन; युद्ध के दौरान, अहजाब स'द बिन मुआदज़ का एक फेंक से मारा गा रहा, यहिसे ओनका ओकर बांह मा नस का काटै का पड़ा -नस का विच्छेदन-। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कय विधि का उपयोग कइके एकर इलाज किहिन - कोयला जलावै का उपयोग कइके एक उपचार विधि -। तब ओकर हाथ फूलि गा। -पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- ने फिर से दोहराया और और भी सूज गया। ई दूसरन द्वारा दोहरावा गा रहा, लेकिन जाहिर तौर पर ई तब तक फूलत रहा जब तक कि खून बाहर न निकल गवा। जब -स'द बिन मुआज़ रदलियाल्लाहुअनहु- ने ई देखिन, तौ उ कहिन; 'हे अल्लाह मोर जान मत लेव कि बनी कुरैदल के काम से मोर आत्मा का चैन मिल जाय', फिर खून बंद होइगा। अऊर जब तक ओनका साद के फैसला नाहीं मिला तब तक एक बूंद भी नाहीं बहाइन। साद का बोलावा गा अऊर उ फैसला किहिन कि मनईन का मार डावा जाय, जबकि औरतन अऊर बच्चन का जिंदा छोड़ दीन जाय अऊर मुसलमानन के मदद कीन जाय। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'सअद ने उनके लिए जो फैसला किया है वह सही है'। चार सौ रहैं। जब उ कैदियन का मार के खतम किहिन, तौ ओकर नस काट दीन गै अऊर उ मरि गा।