Imam Ahmad : 14215
حَدَّثَنَا مُوسَى حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ بَنَّةَ الْجُهَنِيَّ أَخْبَرَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ عَلَى قَوْمٍ فِي الْمَسْجِدِ أَوْ فِي الْمَجْلِسِ يَسُلُّونَ سَيْفًا بَيْنَهُمْ يَتَعَاطَوْنَهُ بَيْنَهُمْ غَيْرَ مَغْمُودٍ فَقَالَ لَعَنَ اللَّهُ مَنْ يَفْعَلُ ذَلِكَ أَوَ لَمْ أَزْجُرْكُمْ عَنْ هَذَا فَإِذَا سَلَلْتُمْ السَّيْفَ فَلْيَغْمِدْهُ الرَّجُلُ ثُمَّ لِيُعْطِهِ كَذَلِكَ
हमसे कहिन है [मूसा] हमसे कहिन है [इब्नू लहिअह] से [अबू अज़ जुबैर] से [जाबिर], बन्नाह अल जुहानी ने उनसे कहा कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम मस्जिद या सभा मा एक लोगन के पास से गुजरिन जे अपने बीच मा आपन तलवार निकालिन अऊर ओनका एक दूसरे का बिना म्यान के दिहिन। फिर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अल्लाह ओनका श्राप देत है जे अइसन करत हैं, या हम तोहका अइसन करै से मना नाहीं किहेन? आपन तलवार निकारिहौ तौ ओका पट्टी से ढँकौ औ फिर अपने मित्र का सौंपौ।'