Tidaklah akan berzina kalau ia dalam keadaan beriman
Imam Ahmad : 14204
حَدَّثَنَا مُوسَى حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ قَالَ سَأَلْتُ جَابِرًا أَسَمِعْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَزْنِي الزَّانِي حِينَ يَزْنِي وَهُوَ مُؤْمِنٌ وَلَا يَسْرِقُ حِينَ يَسْرِقُ وَهُوَ مُؤْمِنٌ قَالَ جَابِرٌ لَمْ أَسْمَعْهُ قَالَ جَابِرٌ وَأَخْبَرَنِي ابْنُ عَمْرٍو أَنَّهُ قَدْ سَمِعَهُ
हमसे कहिस है [मूसा] हमसे कहिस है [इब्न लहिअह] से [अबू अज़ जुबैर] कहिन; हम [जाबिर] से पूछे हई कि का तुमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना है: 'व्यभिचारी जब व्यभिचार करत है तो इमान नाहीं करत है, अऊर चोर जब चोरी करत है तो इमान नाहीं करत है'। जाबिर कहिन; हम एकर बारे मा कभी नाहीं सुने हई। जाबिर कहिन; अऊर [इब्न अम्र] ने मोका सूचित किहिन है। निस्चय ही उ इ सुनि लिहिस है।