Para Malaikat senantiasa terus menaungi syahid dengan sayap-sayap mereka
Imam Ahmad : 13776
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ ابْنِ الْمُنْكَدِرِ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرًا يَقُولُ جِيءَ بِأَبِي يَوْمَ أُحُدٍ فَوُضِعَ بَيْنَ يَدَيْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ مُسَجًّى فَجَعَلْتُ أُرِيدُ أَنْ أَكْشِفَ عَنْ وَجْهِهِ وَيَنْهَانِي قَوْمِي فَسَمِعَ بَاكِيَةً وَقَالَ مَرَّةً صَوْتَ صَائِحَةٍ قَالَ فَقَالَ مَنْ هَذَا فَقَالُوا ابْنَةُ عَمْرٍو أَوْ أُخْتُ عَمْرٍو قَالَ فَلِمَ تَبْكِينَ أَوْ قَالَ أَتَبْكِينَ فَمَا زَالَتْ الْمَلَائِكَةُ تُظِلُّهُ بِأَجْنِحَتِهَا حَتَّى رُفِعَتْ
हमका [सुफियान] से [इब्न अल मुनकादिर] से बतावा गा है कि उ वास्तव मा [जाबिर] का कहत सुने रहे; मोर बाप का उहुद के लड़ाई मा लइके गें रहैं अऊर फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के सामने रख दीन रहैं, उनका ढक दीन गा रहै, तब मैं उनकर चेहरा देखावै चाहत रहौं पै मोर लोग रोक दिहिन रहैं। तब -रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- ने लोगन के रोवै के आवाज सुनी, अऊर उई मौका पर -जाबिर बिन अब्दुल्लाह रद्लियाल्लाहुअनहुमा- कहिन; चीख सुनाई दिहिस। -जाबिर बिन अब्दुल्ला रदलियाल्लाहुअनहुमा- कहिन; तब - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम - ने पूछा, यह आवाज किसकी है ? उन्होंने जवाब दिया कि 'अम्र के बिटिया या 'अम्र के बहिन।' -रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- ने पूछा, 'वह काहे रो रहा है' या 'क्या उसे रोना चाहिए, भले ही परी ने उसे अपने पंखों से ढँक दिया जब तक कि वह ऊपर नहीं उठाया गया?'।