Imam Ahmad : 13294
حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ حَسَّانَ أَخْبَرَنَا عُمَارَةُ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَخَذَ ثَلَاثَ حَصَيَاتٍ فَوَضَعَ وَاحِدَةً ثُمَّ وَضَعَ أُخْرَى بَيْنَ يَدَيْهِ وَرَمَى بِالثَّالِثَةِ فَقَالَ هَذَا ابْنُ آدَمَ وَهَذَا أَجَلُهُ وَذَاكَ أَمَلُهُ الَّتِي رَمَى بِهَا
हमसे [अब्दुश शमाद बिन हसन] बताइस है, हमसे ['उमारा] से [तसाबित] से [अनस] बताइस है, एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तीन कंकड़ लिहिन। फिर उ पहिला कंकड़ रखिन। फिर उ अपने सामने एक अउर दूसर कंकड़ रखिन। अऊर अंत मा उ तीसरा कंकड़ फेंक दिहिस। फिर कहिन: 'ई आदम के बेटवा है, ई ओकर अंत है, अऊर ई ओकर इच्छा है'। उ आदम के बेटवा के सपना के तुलना ओनके फेंके गए कंकड़न से किहिन।