Doa I'tidal - 2: ALLAHUMMA RABBANA WALAKAL HAMDU HAMDAN KATSIIRA THAYYIBA MUBAARAKAN FIIH
Imam Ahmad : 13153
حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ أَخْبَرَنَا قَتَادَةُ وَثَابِتٌ وَحُمَيْدٌ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ رَجُلًا جَاءَ فَدَخَلَ الصَّفَّ وَقَدْ حَفَزَهُ النَّفَسُ فَقَالَ الْحَمْدُ لِلَّهِ حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ فَلَمَّا قَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَاتَهُ قَالَ أَيُّكُمْ الْمُتَكَلِّمُ بِالْكَلِمَاتِ فَأَرَمَّ الْقَوْمُ فَقَالَ أَيُّكُمْ الْمُتَكَلِّمُ بِهَا فَإِنَّهُ لَمْ يَقُلْ إِلَّا خَيْرًا فَقَالَ الرَّجُلُ جِئْتُ وَقَدْ حَفَزَنِي النَّفَسُ فَقُلْتُهَا فَقَالَ لَقَدْ رَأَيْتُ اثْنَيْ عَشَرَ مَلَكًا يَبْتَدِرُونَهَا أَيُّهُمْ يَرْفَعُهَا وَزَادَ حُمَيْدٌ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِذَا جَاءَ أَحَدُكُمْ فَلْيَمْشِ عَلَى نَحْوِ مَا كَانَ يَمْشِي فَلْيُصَلِّ مَا أَدْرَكَ وَلْيَقْضِ مَا سَبَقَهُ قَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ وَالْإِرْمَامُ السُّكُوتُ
हमसे कहिस है ['अफ्फान] हमसे कहिस है [हम्मद] हमसे कहिस है [कतादाह] अऊर [त्साबित] अऊर [हुमैद] [अनास] से, कोई आवा, ऊ तुरंत एक हाँफत साँस के साथ प्रार्थना पंक्ति मा घुसा, फिर कहिस; 'अल्लाह के स्तुति, प्रचुर, अच्छी अऊर धन्य स्तुति'। जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नमाज खतम की तो पूछा पहले कौन पढ़ रहा था?’ तो साथी चुप हो गए। त - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम - कहिन: 'जे पढ़े, उ अच्छा है'। ऊ मनई कहिस; मैं तब आये रहेन जब हमका अबहीं साँस कम रही तौ हमरे पास केवल वही पढ़ै का समय रहा। -रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- कहिन: 'मैं बारह स्वर्गदूतन का -उ शब्द- का उठावै में सक्षम होवै के लिए लड़त देखे हौं।' हुमैद ने जोड़ा कि अनस रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अगर आप में से कोई -नमाज- मंडली में आवत है, तो स्वाभाविक रूप से चलौ अऊर जवन पावत है उ प्रार्थना करौ अऊर जवन छूट गवा है ओकर भरपाई करौ'। अबू अब्दुर्रहमान, अल इरमाम का मतलब है चुप्पी।