Berbuat atau membantu berbuat bid'ah tidak diterima amalan wajib dan sunnahnya
Imam Ahmad : 13051
حَدَّثَنَا مُؤَمَّلٌ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ حُمَيْدٍ وَعَاصِمٌ الْأَحْوَلُ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمَدِينَةُ حَرَامٌ مِنْ كَذَا إِلَى كَذَا مَنْ أَحْدَثَ فِيهَا حَدَثًا أَوْ آوَى مُحْدِثًا فَعَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ لَا يَقْبَلُ اللَّهُ مِنْهُ صَرْفًا وَلَا عَدْلًا قَالَ حَمَّادٌ وَزَادَ فِيهَا حُمَيْدٌ لَا يُحْمَلُ فِيهَا سِلَاحٌ لِقِتَالٍ
हमसे कहिके [मुअम्मल] हमका [हम्मद] से [हुमैद] अऊर [अशिम अल अहवाल] से [अनस] बताइन हैं, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'मदीना इहाँ से इहाँ तक हराम है। जे भी यहिमा पाप करत है या पाप करै वाले के रक्षा करत है, ओका अल्लाह, स्वर्गदूतन अऊर सब मनुष्यन द्वारा श्रापित कीन जाई। अल्लाह न ओकरे पश्चाताप का स्वीकार करिहैं अऊर न ही ओकर फिरौती। हम्माद कहिन; हुमैद ने जोड़ा: यहिमा लड़ाई के लिए कौनो हथियार नाहीं रखा जा सकत है'।