Imam Ahmad : 12535
حَدَّثَنَا بَهْزٌ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ أَنَسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَمُرُّ بِالتَّمْرَةِ فَمَا يَمْنَعُهُ مِنْ أَخْذِهَا إِلَّا مَخَافَةُ أَنْ تَكُونَ صَدَقَةً
हमरा सब के कहलक अछि [बहज] हमरा सब के बता देने अछि [हम्मद] हमरा सब के [कतादह] के [अनस] स कहलक अछि, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तारीख भेटल छल, आ ओकरा एकरा लेबय स कोनो रोकय वाला बात नै छल सिवाय एहि चिंता के जे की ई दान के तारीख भ सकैत अछि।