Imam Bukhari : 6281
حَدَّثَنَا مَكِّيُّ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ الْجُعَيْدِ عَنْ يَزِيدَ بْنِ خُصَيْفَةَ عَنْ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ قَالَكُنَّا نُؤْتَى بِالشَّارِبِ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَإِمْرَةِ أَبِي بَكْرٍ وَصَدْرًا مِنْ خِلَافَةِ عُمَرَ فَنَقُومُ إِلَيْهِ بِأَيْدِينَا وَنِعَالِنَا وَأَرْدِيَتِنَا حَتَّى كَانَ آخِرُ إِمْرَةِ عُمَرَ فَجَلَدَ أَرْبَعِينَ حَتَّى إِذَا عَتَوْا وَفَسَقُوا جَلَدَ ثَمَانِينَ
हमका [मक्की बिन इब्राहिम] से [अल जुएद] से [यजीद बिन हुशैफा] से [अस साईब बिन यजीद] से कहिन है; हमका एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के समय, अबू बकर के शासनकाल मा अऊर उमर के शासनकाल के शुरुआत मा एक शराबी दीन गा रहा, फिर हम ओका अपने हाथन, चप्पल अऊर कपड़ा से कोड़ा मारिन, जब तक कि उमर के शासनकाल के अंत मा, उ ओका चालीस कोड़ा मारिन जब तक कि अगर उ अबहियों अवज्ञा नाहीं करत रहा अऊर उमर ओनका कोड़ा मारिन, बार।