Imam Ahmad : 11974
حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ يَعْنِي ابْنَ طَلْحَةَ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْإِزَارُ إِلَى نِصْفِ السَّاقِ وَإِلَى الْكَعْبَيْنِ لَا خَيْرَ فِي أَسْفَلَ مِنْ ذَلِكَ
हमसे कहिन है [अबू अन नदलर] कहिन, हमसे कहिन हैं [मुहम्मद] - अर्थात् इब्न तलहा - [हुमैद] से [अनस] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से, उ कहिन: 'सरोंग के सीमा आधे बछड़े से दुई टखने तक है, अऊर वहिसे आगे कौनो अच्छी चीज नाहीं है'।