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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Doa Rasulullah: Ya Allah ampunilah anshar dan keturunan mereka

Imam Ahmad : 11964

حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ حَدَّثَنَا الْمُبَارَكُ عَنْ ثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَ شَقَّ عَلَى الْأَنْصَارِ النَّوَاضِحُ فَاجْتَمَعُوا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَسْأَلُونَهُ أَنْ يُجْرِيَ لَهُمْ نَهْرًا سَيْحًا فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرْحَبًا بِالْأَنْصَارِ وَاللَّهِ لَا تَسْأَلُونِي الْيَوْمَ شَيْئًا إِلَّا أَعْطَيْتُكُمُوهُ وَلَا أَسْأَلُ اللَّهَ لَكُمْ شَيْئًا إِلَّا أَعْطَانِيهِ فَقَالَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ اغْتَنِمُوهَا وَاطْلُبُوا الْمَغْفِرَةَ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ ادْعُ اللَّهَ لَنَا بِالْمَغْفِرَةِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِلْأَنْصَارِ وَلِأَبْنَاءِ الْأَنْصَارِ وَلِأَبْنَاءِ أَبْنَاءِ الْأَنْصَارِ

हमसे कहिन [अबू अन नदलर] कहिन, हमसे [अल मुबारक] से [थाबित अल बुनानी] से [अनस बिन मलिक] कहिन; 'अंसार लोग पानी के कमी के शिकायत किहिन, फिर उ लोग पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने इकट्ठा भए, उ लोग उनसे सैहान नदी का निकासी करै का कहिन। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओनसे कहिन: 'अनसार के लोगन का स्वागत है, अल्लाह के कसम, तुम आज मुझसे नाहीं मांगत हौ जब तक कि मैं तुमका नाहीं देब। अऊर मैं अल्लाह से तोहरे लिए कुछौ नाहीं मांगत हउँ जब तक कि उ निश्चित रूप से नाहीं देई।' फिर एक दूसरे से कहिन, 'लाभ उठावा, अऊर माफी माँगा'। तब उइ कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल, हमरे लिए अल्लाह से माफी मांगो'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम तब कहिन: 'हे अल्लाह, अंसार लोगन का माफ करौ, ओनके बच्चन का माफ करौ अऊर ओनके बच्चन के बच्चान का माफ करौ'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 11964, 12134, 12190, 12749, 12791, 18489, 18494, 18517, 18531, 18537
Imam Bukhari : 4526
Imam Muslim : 4561, 4562
Imam Tirmidzi : 3837, 3844
Imam Ibnu Majah : 161