Imam Ahmad : 11787
حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ أَخْبَرَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ ثَابِتٍ الْبُنَانِيِّ عَنْ أَنَسٍ قَالَ لَمَّا هَاجَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَرْكَبُ وَأَبُو بَكْرٍ رَدِيفُهُ وَكَانَ أَبُو بَكْرٍ يُعْرَفُ فِي الطَّرِيقِ لِاخْتِلَافِهِ إِلَى الشَّامِ وَكَانَ يَمُرُّ بِالْقَوْمِ فَيَقُولُونَ مَنْ هَذَا بَيْنَ يَدَيْكَ يَا أَبَا بَكْرٍ فَيَقُولُ هَادٍ يَهْدِينِي فَلَمَّا دَنَوْا مِنْ الْمَدِينَةِ بَعَثَ إِلَى الْقَوْمِ الَّذِينَ أَسْلَمُوا مِنْ الْأَنْصَارِ إِلَى أَبِي أُمَامَةَ وَأَصْحَابِهِ فَخَرَجُوا إِلَيْهِمَا فَقَالُوا ادْخُلَا آمِنَيْنِ مُطَاعَيْنِ فَدَخَلَا قَالَ أَنَسٌ فَمَا رَأَيْتُ يَوْمًا قَطُّ أَنْوَرَ وَلَا أَحْسَنَ مِنْ يَوْمِ دَخَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبُو بَكْرٍ الْمَدِينَةَ وَشَهِدْتُ وَفَاتَهُ فَمَا رَأَيْتُ يَوْمًا قَطُّ أَظْلَمَ وَلَا أَقْبَحَ مِنْ الْيَوْمِ الَّذِي تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيهِ
हमनी के बतवले बाड़े [यजीद बिन हारून] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [हमद बिन सलामाह] से [थाबीत अल बुनानी] से [अनास] से उ कहले बाड़े; 'जब उ मदीना पलायन कईले त रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एगो गाड़ी चलावत रहले जबकि अबू बकर पीछे से उनुका पीछे-पीछे चलत रहले। रास्ता में अबू बकर के जानल जाला काहे कि ऊ अक्सर सीरिया जात रहले, एहसे जब ऊ कवनो लोग से गुजरत रहले त ऊ लोग कहत रहे; 'हे अबू बकर, तोहरा बगल में ई व्यक्ति के ह?' अबू बकर जवाब दिहले; 'उ हमार मार्गदर्शक हवें'। त जब उ मदीना शहर के नजदीक पहुंचले त उ अबू उमामा अवुरी उनुका दोस्त से मिले खाती अंसार से मुसलमान के भेजले, फेर उ लोग उनुका दुनो के अभिवादन करे निकलले। उ लोग कहल कि; 'तू दुनु जाना के सुरक्षित घुस जा आ तोहार बात मानल जाई,' त दुनु जाना घुस गईले'। अनस कहले कि; 'हम ओह दिन से ज्यादा उज्जवल आ सुन्दर दिन ना देखले रहनी जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आ अबू बकर मदीना शहर में घुसल रहले। आ जब हम रसुलुल्लाह के मौत देखनी त कबो अइसन दिन ना देखनी जवन ओह दिन से बेसी उदास आ चुपचाप होखे जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मौत हो गइल रहे!'