इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



इमाम अहमद : 11649

حَدَّثَنَا سُفْيَانُ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ حَسَّانَ عَنْ أَنَسٍ وَابْنُ سِيرِينَ قَالَ لَمَّا رَمَى النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَمْرَةَ الْعَقَبَةِ وَنَحَرَ هَدْيَهُ حَجَمَ وَأَعْطَى الْحَجَّامَ وَقَالَ سُفْيَانُ مَرَّةً وَأَعْطَى الْحَالِقَ شِقَّهُ الْأَيْمَنَ فَحَلَقَهُ فَأَعْطَاهُ أَبَا طَلْحَةَ ثُمَّ حَلَقَ الْأَيْسَرَ فَأَعْطَاهُ النَّاسَ

हमें [सुफ़यान] ने बताया है, हमें [हस्याम बिन हसन] ने [अनस] और [इब्न सिरिन] से बताया है, उन्होंने कहा; "जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अक़बाह का दान फेंक दिया और कुर्बानी का जानवर ज़बह किया, तो उन्होंने कपिंग की और उसे कपिंग करने वाले को दे दिया," कभी-कभी सुफ़यान ने उल्लेख किया; "नाई को दाहिना हिस्सा दो। फिर शेव करो और उसने इसे अबू तल्हा को दिया, फिर उसने बायाँ हिस्सा शेव किया, फिर उसने इसे लोगों को दे दिया।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 1695, 1696, 1697, 1698, 1700, 1702, 1709, 1710, 1711, 1714, 1718, 1719, 1723, 1724, 1726, 1728, 1730, 1731, 1734, 1735, 1952, 2141, 2433, 3030, 3552, 3765, 11649, 14753, 14863, 14864, 14865
इमाम बुखारी : 1443, 1573, 1574
इमाम मुस्लिम : 2246, 2247, 2248
इमाम अबू दाऊद : 1549, 1620, 1688, 1691
इमाम तिर्मिदज़ी : 841
इमाम नसाई : 2970, 3002, 3005, 3006, 3008, 3030, 3031, 3032
इमाम इब्नु माजा : 3030, 3031
इमाम दरिमी : 1814, 1823