Imam Ahmad : 10887
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا عَوْفٌ عَنْ أَبِي الصِّدِّيقِ النَّاجِيِّ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى تَمْتَلِئَ الْأَرْضُ ظُلْمًا وَعُدْوَانًا قَالَ ثُمَّ يَخْرُجُ رَجُلٌ مِنْ عِتْرَتِي أَوْ مِنْ أَهْلِ بَيْتِي يَمْلَؤُهَا قِسْطًا وَعَدْلًا كَمَا مُلِئَتْ ظُلْمًا وَعُدْوَانًا
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन जाफर] कहिन; हमका ['अउफ] [अबू अश शिद्दीक अन नाजी] से [अबू सईद अल खुदरी] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'कियामत का दिन तब तक नहीं होगा जब तक धरती अन्याय और दुश्मनी से भर न जाय,' उन्होंने कहा: 'तब मेरे वंशज या मेरे मंदिर के सदस्यों में से एक ऐसा आदमी निकलेगा जो धरती को न्याय से भर देगा जैसा कि यह अन्याय और दुश्मनी से भरा है'।