Amalkanlah kebaikan meski dari balik lautan
Imam Ahmad : 10682
حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ الْفَزَارِيُّ عَنِ الْأَوْزَاعِيِّ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَ جَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلَهُ عَنْ الْهِجْرَةِ فَقَالَ وَيْحَكَ إِنَّ الْهِجْرَةَ شَأْنُهَا شَدِيدٌ فَهَلْ لَكَ مِنْ إِبِلٍ قَالَ نَعَمْ قَالَ هَلْ تُؤَدِّي صَدَقَتَهَا قَالَ نَعَمْ قَالَ هَلْ تَمْنَحُ مِنْهَا قَالَ نَعَمْ قَالَ هَلْ تَحْلِبُهَا يَوْمَ وِرْدِهَا قَالَ نَعَمْ قَالَ فَاعْمَلْ مِنْ وَرَاءِ الْبِحَارِ فَإِنَّ اللَّهَ لَنْ يَتِرَكَ مِنْ عَمَلِكَ شَيْئًا
हमका बतावा गा है [मुआविया बिन अमरू] कहिन; हमसे [अबू इशाक अल फजारी] से [अल औजाई] से [अज़ जुहरी] से ['अथो` बिन यजीद] से [अबू सईद अल खुदरी] से कहिन है, उ कहिन, एक आदमी पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हिजरा के बारे मा पूछै आवा रहा, तौ उ कहिन: 'हाय तुमका, हिजरा बहुत मुश्किल है, तोहरे पास एक काम है ऊँट?' उ जवाब दिहिस; 'हाँ,' ऊ पूछिस: 'का तुम जकात चुकाये हौ?' उ जवाब दिहिस; 'हाँ,' ऊ पूछिस: 'का तुम ओसे दान किहे हौ?' उ जवाब दिहिस; 'हाँ,' ऊ फिर पूछिस: 'जउने दिन ऊका पानी मिला रहा, का तुम ओका दूध पिलाये रहेव?' उ जवाब दिहिस; 'हाँ,' उ कहिन: 'समुद्र के पार से जइसे आप चाहें अच्छा काम करौ, काहे से कि निश्चय अल्लाह आपके कौनो अच्छा काम का बर्बाद नाहीं करिहै'।