Imam Ahmad : 10670
حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ بْنُ عِيسَى حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ كُنَّا قُعُودًا نَكْتُبُ مَا نَسْمَعُ مِنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَخَرَجَ عَلَيْنَا فَقَالَ مَا هَذَا تَكْتُبُونَ فَقُلْنَا مَا نَسْمَعُ مِنْكَ فَقَالَ أَكِتَابٌ مَعَ كِتَابِ اللَّهِ فَقُلْنَا مَا نَسْمَعُ فَقَالَ اكْتُبُوا كِتَابَ اللَّهِ أَمْحِضُوا كِتَابَ اللَّهِ أَكِتَابٌ غَيْرُ كِتَابِ اللَّهِ أَمْحِضُوا كِتَابَ اللَّهِ أَوْ خَلِّصُوهُ قَالَ فَجَمَعْنَا مَا كَتَبْنَا فِي صَعِيدٍ وَاحِدٍ ثُمَّ أَحْرَقْنَاهُ بِالنَّارِ قُلْنَا أَيْ رَسُولَ اللَّهِ أَنَتَحَدَّثُ عَنْكَ قَالَ نَعَمْ تَحَدَّثُوا عَنِّي وَلَا حَرَجَ وَمَنْ كَذَبَ عَلَيَّ مُتَعَمِّدًا فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ قَالَ فَقُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَنَتَحَدَّثُ عَنْ بَنِي إِسْرَائِيلَ قَالَ نَعَمْ تَحَدَّثُوا عَنْ بَنِي إِسْرَائِيلَ وَلَا حَرَجَ فَإِنَّكُمْ لَا تَحَدَّثُوا عَنْهُمْ بِشَيْءٍ إِلَّا وَقَدْ كَانَ فِيهِمْ أَعْجَبَ مِنْهُ
हमका बतावा गा है [इशाक बिन ईसा] कहिन; हमका [अब्दुर्रहमान बिन जैद] [अपने पिता] से, ['अथो` बिन यासर] से [अबू हुरैरा] से कहिन है; 'हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से जो सुना है, वही लिख रहे बैठे थे, फिर हमसे मिलने निकले और बोले : का लिख रहे हो?' हमने जवाब दिया, 'हमने आपसे जो सुना,' उन्होंने कहा: 'अल्लाह के किताब के अलावा और कोई किताब है?' हम जवाब देत हैं; 'हम नाहीं सुनेन,' उ कहिन: 'अल्लाह के किताब लिखौ अऊर शुद्ध करौ, का अल्लाह के किताब के अलावा अउर कौनो किताब है! अपनी किताब का शुद्ध करा, -या उ कहिन, - 'इका शुद्ध करा'। अबू हुरैरा कहिन; फिर हम जवन कुछ लिखे रहेन सब एक जगह इकट्ठा किहेन, वहिके बाद हम ओका आगि से जला दिहेन। हम पूछेन; 'हे अल्लाह के रसूल, का हम आपसे एक हदीस पहुँचा सकित है?' उन्होंने कहा: 'हाँ, मुझसे पहुँचाओ और पाप नहीं है, जो जानबूझकर मेरे नाम से झूठ बोले, नरक में अपनी आसन तैयार करौ'। अबू हुरैरा कहिन; हम फिर से पूछेन; 'हे अल्लाह के रसूल, का हम इजरायल के बच्चन से कुछ बता सकित है?' उ जवाब दिहिस, 'हाँ, इजरायल के बच्चन से बतावा अऊर कउनो पाप नाहीं है, वास्तव मा तुम ओनसे कुछौ नाहीं बतावा जब तक कि ओनके बीच से कुछ अउर आश्चर्यजनक न होय।'