Imam Ahmad : 10633
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ مُضَرَ عَنِ ابْنِ الْهَادِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ خَبَّابٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا تُوَاصِلُوا فَأَيُّكُمْ أَرَادَ أَنْ يُوَاصِلَ فَلْيُوَاصِلْ حَتَّى السَّحَرِ فَقَالُوا إِنَّكَ تُوَاصِلُ قَالَ إِنِّي لَسْتُ كَهَيْئَتِكُمْ إِنِّي أَبِيتُ لِي مُطْعِمٌ يُطْعِمُنِي وَسَاقٍ يَسْقِينِي
हमसे कहिन है [कुतैबा] कहिन; हमसे [बकर बिन मुदलर] [इब्नुल हद] से [अब्दुल्लाह बिन खबाब] से [अबू सैद अल खुदरी] से कहिन है कि उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुने हैं: 'विशोल का उपवास न रखौ, लेकिन अगर तुम विशोल चाहत हौ, तौ साहुर के समय तक काफी है,' साथियन ने कहा; 'तुम खुदै किहेव!' उ कहिन: 'वास्तव मा, मैं तोहरे जइसन नाहीं हउँ, रात मा मोर पास एक खिलावै वाला सार है जउन मोका खाना-पीना देई'।