Imam Ahmad : 10620
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ سَمِعَ عَمْرًا عَنْ عَتَّابِ بْنِ حُنَيْنٍ يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ سُفْيَانُ لَا أَدْرِي مَنْ عَتَّابٌ لَوْ أَمْسَكَ اللَّهُ الْقَطْرَ عَنْ النَّاسِ سَبْعَ سِنِينَ ثُمَّ أَرْسَلَهُ لَأَصْبَحَتْ طَائِفَةٌ بِهِ كَافِرِينَ يَقُولُونَ مُطِرْنَا بِنَوْءِ الْمِجْدَحِ
हमसे [सुफयान] बताइन हैं कि उ [अत्तब बिन हुनैन] से [अमरू] का [अबू सईद] से बतावत सुने हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: -सुफियान ने कहा; हम नाहीं जानित कि अत्ताब कौन अहै, - 'अगर अल्लाह सात साल तक मनुष्यन से बारिश रोकत, तौ वहिके बाद उ ओका उतार दिहिस, तौ वाकई मा लोगन के एक समूह होइ जे ओसे काफिर करत, उइ कहिन; 'हमका तारा मिजदाह के कारण बारिस मिली'।'