Orang yang memberi syafa'at masuk menemui mereka, seorang lelaki akan mengambil orang-orang yang ditolongnya sehingga dia membangkitkan mereka
Imam Ahmad : 10593
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ عَنْ سُلَيْمَانَ يَعْنِي التَّيْمِيَّ عَنْ أَبِي نَضْرَةَ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَّا أَهْلُ النَّارِ الَّذِينَ هُمْ أَهْلُهَا لَا يَمُوتُونَ وَلَا يَحْيَوْنَ وَأَمَّا أُنَاسٌ يُرِيدُ اللَّهُ بِهِمْ الرَّحْمَةَ فَيُمِيتُهُمْ فِي النَّارِ فَيَدْخُلُ عَلَيْهِمْ الشُّفَعَاءُ فَيَأْخُذُ الرَّجُلُ أَنْصَارَهُ فَيَبُثُّهُمْ أَوْ قَالَ فَيَنْبُتُونَ عَلَى نَهَرِ الْحَيَاءِ أَوْ قَالَ الْحَيَوَانِ أَوْ قَالَ الْحَيَاةِ أَوْ قَالَ نَهَرِ الْجَنَّةِ فَيَنْبُتُونَ نَبَاتَ الْحِبَّةِ فِي حَمِيلِ السَّيْلِ قَالَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَا تَرَوْنَ الشَّجَرَةَ تَكُونُ خَضْرَاءَ ثُمَّ تَكُونُ صَفْرَاءَ أَوْ قَالَ تَكُونُ صَفْرَاءَ ثُمَّ تَكُونُ خَضْرَاءَ قَالَ فَقَالَ بَعْضُهُمْ كَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ بِالْبَادِيَةِ
हमसे [इब्न अबू आदी] [सुलेमान] से - अर्थात् अत तैमी - [अबू नधरा] से [अबू सैद] से कहिन है; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'नरक के निवासी, जिनके वे वास्तव में निवासी हैं, न तो मरेंगे और न ही जीएंगे, जिनके लिए अल्लाह ने दया की है, उन्हें नरक में मार डालेगा, फिर जो लोग मध्यस्थता करिहैं, उनसे मिलने के लिए प्रवेश करिहैं, एक आदमी उनको ले जाएगा, जिनकी उ मदद करत है, ताकि उन्हें पुनर्जीवित करेगा, - या उन्होंने कहा, -' जीवन नदी, -या उ कहिन, - 'जानवर, -या उ कहिन, - 'जीवित हैं, -या उ कहिन, - 'स्वर्ग मा नदियाँ, फिर नदी के बहाव मा बीज के रूप मा बढ़त हैं'। अबू सईद कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'का तुम नाहीं देखत हौ कि पेड़ हरे अऊर फिर पीले कैसे होइ जात हैं, -या उ कहिन, - 'वे पीला होइ जात हैं, फिर हरे होइ जात हैं?' अबू सईद कहिन; तौ ओनमा से कुछ लोग कहिन- 'ई तौ लागत रहा जइसे ऊ जंगल के बीच मा होय'।