Larangan seorang wanita dipoligami bibinya dari pihak ayah maupun ibu
Imam Ahmad : 9458
حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ حَدَّثَنَا لَيْثٌ قَالَ حَدَّثَنِي عُقَيْلٌ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّهُ سُئِلَ عَنْ الرَّجُلِ يَجْمَعُ بَيْنَ الْمَرْأَةِ وَبَيْنَ خَالَةِ أَبِيهَا وَالْمَرْأَةِ وَخَالَةِ أُمِّهَا أَوْ بَيْنَ الْمَرْأَةِ وَعَمَّةِ أَبِيهَا أَوْ الْمَرْأَةِ وَعَمَّةِ أُمِّهَا فَقَالَ قَالَ قَبِيصَةُ بْنُ ذُؤَيْبٍ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُجْمَعَ بَيْنَ الْمَرْأَةِ وَخَالَتِهَا وَبَيْنَ الْمَرْأَةِ وَعَمَّتِهَا فَنَرَى خَالَةَ أُمِّهَا وَعَمَّةَ أُمِّهَا بِتِلْكَ الْمَنْزِلَةِ وَإِنْ كَانَ مِنْ الرَّضَاعِ يَكُونُ مِنْ ذَلِكَ بِتِلْكَ الْمَنْزِلَةِ
हमसे कहिन है [हज्जाज] हमसे कहिन है [लैट्स] ने [इब्न शिहाब] से ['उकैल] बतावा है, कि उनसे एक आदमी के बारे मा पूछा गा रहा जे एक औरत का अपने पिता के चाची के साथ -माता के वंश से- अऊर अपनी महतारी के चाची के साथ -माँ के वंश से-, या एक औरत का अपने पिता के चाची के साथ - अऊर पिता के वंश से एक औरत का एक साथ लाया है। अपनी महतारी के चाची के साथे -पिता के वंश से- शादी मा। त उ जवाब दिहिस; कहेन; [कबिशाह बिन ज़ू`एब] कहिन; हम [अबू हुरैराह] का कहत सुने रहेन; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शादी में औरत का अपनी मौसी के साथ - चाहे पिता के वंश से हो या माता के वंश से - एक साथ लाने से मना किया, 'हम देखत हैं कि ओकर महतारी के मौसी - चाहे पिता के वंश से हो या माई के वंश से - एक ही स्थिति में हैं, भले ही उ एक ही वंश से हों, फिर भी एक ही कानून है।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 544, 1782, 3350, 6481, 6836, 7151, 8761, 8836, 9102, 9136, 9216, 9458, 9573, 9614, 9755, 10272, 10294, 10299, 10424, 10466, 14106, 14567
Imam Bukhari : 4717, 4718, 4719
Imam Muslim : 2514, 2515, 2516, 2517, 2518, 2519, 2520, 2521
Imam Abu Dawud : 1768, 1769, 1770
Imam Tirmidzi : 1044, 1045
Imam Nasa'i : 3236, 3237, 3238, 3239, 3240, 3241, 3242, 3243, 3244, 3245, 3246, 3247
Imam Ibnu Majah : 1919, 1920, 1921
Imam Malik : 977, 978
Imam Darimi : 2083, 2084