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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 9453

حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ قَالَ حَدَّثَنَا لَيْثٌ قَالَ حَدَّثَنِي سَعِيدُ بْنُ أَبِي سَعِيدٍ عَنْ أَخِيهِ عَبَّادِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا هُرَيْرَةَ يَقُولُ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ الْأَرْبَعِ مِنْ عِلْمٍ لَا يَنْفَعُ وَمِنْ قَلْبٍ لَا يَخْشَعُ وَمِنْ نَفْسٍ لَا تَشْبَعُ وَمِنْ دُعَاءٍ لَا يُسْمَعُ

हमसे कहिन है [हज्जाज] हमसे कहिन है [लैट्स] ने हमसे [सैद बिन अबी सैद] अपने भाई [अब्बाद बिन अबी सैद] से कहिन हैं, कि उ [अबू हुरैरा] का सुनिन कि उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा प्रार्थना करत रहें: 'अल्लाहुम्मा इन्नी अ'उदज़ू बीका मिनल अरबा' मिन 'इल्मिन ला यान्फा' वा मिन कल्बिन ला यख्श्या' वा मिन नफसिन ला तासीबा' वा मिन दु'आ इन ला यम्मा' अल्लाह से मैं चार शरण से शरणार्थ करत हउँ। चीजन; ज्ञान से जवन उपयोगी नाहीं है, एक दिल से जवन कभी डरत नाहीं है, एक आत्मा से जवन कभी संतुष्ट नाहीं होत है अऊर प्रार्थना से जवन नाहीं सुना जात है'।