Imam Ahmad : 8321
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ إِسْحَاقَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثَةٌ كُلُّهُمْ حَقٌّ عَلَى كُلِّ مُسْلِمٍ عِيَادَةُ الْمَرِيضِ وَشُهُودُ الْجِنَازَةِ وَتَشْمِيتُ الْعَاطِسِ إِذَا حَمِدَ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ
हमसे कहिन है [यह्या बिन इशाक] हमसे [अबू अवाना] [उमर बिन अबू सलामा] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से कहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तीन चीजें हैं जिनका हर मुसलमान का अधिकार है; बीमार लोगन से मिलब, लाश के शोक मनावै अऊर अल्लाह से हमदला कहै पर छींकै वाले लोगन के दुआ का जवाब देब'।