Membaca: ALLAHUMMA BIKA ASHBAHNA WA BIKA AMSAINA WA BIKA NAHYAA WA BIKA NAMUUTU WA ILAIKAN NUSYUR
Imam Ahmad : 8295
حَدَّثَنَا حَسَنٌ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَقُولُ إِذَا أَصْبَحَ اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا وَبِكَ أَمْسَيْنَا وَبِكَ نَحْيَا وَبِكَ نَمُوتُ وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ
हमसे कहिस है [हसन] हमसे [हम्मद] [सुहैल बिन अबू सालिह] से [अपने पिता] से [अबू हुरैरा] से कहिस है, उ कहिन; कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सुबह जब उन्होंने प्रार्थना की तो कहा, 'अल्लाहुम्मा बिका अशबहना वा बिका अमसैना वा बिका नह्या वा बिका नामूतु - हे अल्लाह, सुबह हम तुम्हारे आशीर्वाद से धन्य होते हैं और शाम को हम तुम्हारे साथ धन्य हैं, जो हमको देता है जीवन अऊर हमका मरवावत है, अऊर हम तोहरे पास लौटत हैं'।