Imam Ahmad : 8049
وَبِإِسْنَادِهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ كَانَ رَجُلَانِ مِنْ بَلِيٍّ مِنْ قُضَاعَةَ أَسْلَمَا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَاسْتُشْهِدَ أَحَدُهُمَا وَأُخِّرَ الْآخَرُ سَنَةً قَالَ طَلْحَةُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ فَأُرِيتُ الْجَنَّةَ فَرَأَيْتُ فِيهَا الْمُؤَخَّرَ مِنْهُمَا أُدْخِلَ قَبْلَ الشَّهِيدِ فَعَجِبْتُ لِذَلِكَ فَأَصْبَحْتُ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ ذُكِرَ ذَلِكَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَلَيْسَ قَدْ صَامَ بَعْدَهُ رَمَضَانَ وَصَلَّى سِتَّةَ آلَافِ رَكْعَةٍ أَوْ كَذَا وَكَذَا رَكْعَةً صَلَاةَ السَّنَةِ حَدَّثَنَا يَزِيدُ يَعْنِي ابْنَ هَارُونَ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ طَلْحَةَ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ أَنَّ رَجُلَيْنِ مِنْ بَلِيٍّ وَهُمْ حَيٌّ مِنْ قُضَاعَةَ فَذَكَرَهُ
आ अपना सनाद के साथे, [अबू हुरैरा] से कहले; 'कुदह कबीला के बली के दु आदमी रहले जवन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संगे इस्लाम अपना लेले रहले, अवुरी दुनो में से एगो के पहिले शहीद हो गईल, जबकि दूसरा अभी जिंदा रहे अवुरी एक साल बाद शहीद हो गईल रहे। थोल्हाह बिन उबैदिल्लाह कहले कि; 'त हमरा के सपना में स्वर्ग देखावल गईल, हम देखनी कि दुनो में से आखिरी के पहिला से पहिले स्वर्ग में डाल दिहल जात रहे, जवना से हमरा अचरज भईल, अवुरी सबेरे हम इ बात कहनी - चाहे इ बतावल गईल रहे - अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के।' त उ कहले कि, का इ सही नईखे कि पहिला के मरला के बाद उ रमजान में रोजा रखले अवुरी छह हजार रकाअत, चाहे एक साल में एतना अवुरी केतना रकाअत नमाज पढ़ले?' हमरा के [यजीद] - यानी इब्न हारून - से बतवले बाड़े, हमरा के [मुहम्मद बिन अमरू] [अबू सलामाह] से [थोल्हाह बिन उबैदिल्लाह] से बतवले बाड़े कि बलिय के दु आदमी रहले, जवन कि कुदह गांव में से एगो से रहले, तब उ ऊपर हदीस के जिक्र कईले।