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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Bukhari : 5795

حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا بِشْرُ بْنُ شُعَيْبٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ كَعْبٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَلِيًّا يَعْنِي ابْنَ أَبِي طَالِبٍ خَرَجَ مِنْ عِنْدِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ح و حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنَا عَنْبَسَةُ حَدَّثَنَا يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُخَرَجَ مِنْ عِنْدِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي وَجَعِهِ الَّذِي تُوُفِّيَ فِيهِ فَقَالَ النَّاسُ يَا أَبَا حَسَنٍ كَيْفَ أَصْبَحَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَصْبَحَ بِحَمْدِ اللَّهِ بَارِئًا فَأَخَذَ بِيَدِهِ الْعَبَّاسُ فَقَالَ أَلَا تَرَاهُ أَنْتَ وَاللَّهِ بَعْدَ الثَّلَاثِ عَبْدُ الْعَصَا وَاللَّهِ إِنِّي لَأُرَى رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَيُتَوَفَّى فِي وَجَعِهِ وَإِنِّي لَأَعْرِفُ فِي وُجُوهِ بَنِي عَبْدِ الْمُطَّلِبِ الْمَوْتَ فَاذْهَبْ بِنَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَنَسْأَلَهُ فِيمَنْ يَكُونُ الْأَمْرُ فَإِنْ كَانَ فِينَا عَلِمْنَا ذَلِكَ وَإِنْ كَانَ فِي غَيْرِنَا أَمَرْنَاهُ فَأَوْصَى بِنَا قَالَ عَلِيٌّ وَاللَّهِ لَئِنْ سَأَلْنَاهَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَيَمْنَعُنَا لَا يُعْطِينَاهَا النَّاسُ أَبَدًا وَإِنِّي لَا أَسْأَلُهَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَبَدًا

हमसे कहिस है [इशाक] हमसे कहिस है [बिसिर बिन स्युएब] हमसे कहिस है [मेरे पिता] से [अज जुहरी] उ कहिन; मोका [अब्दुल्लाह बिन का'ब] सूचित किहिन हैं कि [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] ओनका सूचित किहिन हैं, कि [अली, अर्थात् इब्न अबू तालिब] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पक्ष छोड़ दिहिन हैं। अऊर ई एक अउर मार्ग से सुनावा गा है, हमसे कहिस है [अहमद बिन सालिह] हमसे कहिस है ['अनबासा] हमसे कहिस है [यूनुस] से [इब्न शिहाब] उ कहिन; मोका [अब्दुल्लाह बिन काब बिन मलिक] सूचित किहिन है कि [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] ओनका सूचित किहिन हैं; कि [अली बिन अबू तालिब] रदलियाल्लाहु अन्हू पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पक्ष छोड़ दिहिन जब उ बीमार रहे जेहिसे उनकर मौत होइ गै, तौ लोग पूछिन; 'हे अबू हसन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हाल कैसा है?' उ जवाब दिहिन; 'भगवान का शुक्र है कि उ अच्छा महसूस कर रहा है'। तब अब्बास ने उसका हाथ पकड़कर कहा; 'अल्लाह के कसम तुम देखत नाहीं हौ का? दरअसल, हम जानित है कि रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ई बीमारी के कारण मर जइहैं। दरअसल, अब्दुल मुठतालिब के बच्चन के चेहरा भी जानत हई जब उ आपन मौत का सामना करत हैं। चलो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले फिर पूछते हैं कि ये मामला -नेतृत्व- किसको सौंपा जायेगा ? अगर ई -हमरे- लोगन के लिए है, तौ हमका यहिके बारे मा पता है अऊर अगर ई हमरे अलावा केहू अउर के - सौंपा जात है- तौ हम ओसे कहब कि ई हमका वसीयत करै।' तब अली रदलियाल्लाहु अन्हू ने कहा; 'अल्लाह के कसम, अगर हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ई माँगब अऊर उ मना करि देई, तौ लोग हमका ई कबहूँ नाहीं देइहैं। यहिसे, मैं रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से हमेशा के लिए नाहीं माँगब'।