Imam Ahmad : 7783
وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالَّذِي نَفْسُ مُحَمَّدٍ فِي يَدِهِ لَوْلَا أَنْ أَشُقَّ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ مَا قَعَدْتُ خَلْفَ سَرِيَّةٍ تَغْزُو فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَلَكِنْ لَا أَجِدُ سَعَةً فَأَحْمِلَهُمْ وَلَا يَجِدُونَ سَعَةً فَيَتَّبِعُونِي وَلَا تَطِيبُ أَنْفُسُهُمْ أَنْ يَقْعُدُوا بَعْدِي
अबहियों पिछली हदीस के समान संचरण मार्ग से गुजरत अहै; [अबू हुरैराह] से; अऊर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'उनके कसम जेकरे हाथ मा मुहम्मद के आत्मा है, अगर हम मुमिनन पर बोझ न डालित, त हम अल्लाह के राह मा लड़त सैनिकन से पीछे न रहित, लेकिन हमका अइसन जगह नाहीं मिली कि हम ओनका ले जा सकित, अऊर न ही ओनका हमार पीछे चलै के जगह मिली, अऊर आपन आत्मा के बाद आराम महसूस नाहीं किहिन। हम'।