Nabi tidak menyukai jawaban "saya" ketika menanyakan siapa yang mengetuk pintu
Imam Bukhari : 5781
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ هِشَامُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا يَقُولُأَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي دَيْنٍ كَانَ عَلَى أَبِي فَدَقَقْتُ الْبَابَ فَقَالَ مَنْ ذَا فَقُلْتُ أَنَا فَقَالَ أَنَا أَنَا كَأَنَّهُ كَرِهَهَا
हमसे कहिन है [अबू अल वालिद हिशम बिन अब्दुल मलिक] हमसे [स्युबाह] [मुहम्मद बिन अल मुनकादिर] से कहिन हैं, उ कहिन; हम [जाबिर बिन अब्दुल्ला] रादलियाल्लाहु अन्हुमा का कहत सुने रहेन; 'अपने पिता के कर्ज के कारण पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला, फिर उनका दरवाजा खटखटाया, उन्होंने पूछा: 'वह कौन है?' हम जवाब दिहेन; 'मैं'। उ कहिन: 'मैं, मैं!'। मानो ऊ ओसे नफरत करत रहा'।