Imam Ahmad : 7758
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي زِيَادٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ أَمَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِثَلَاثٍ وَنَهَانِي عَنْ ثَلَاثٍ أَمَرَنِي بِرَكْعَتَيْ الضُّحَى كُلَّ يَوْمٍ وَالْوِتْرِ قَبْلَ النَّوْمِ وَصِيَامِ ثَلَاثَةِ أَيَّامٍ مِنْ كُلِّ شَهْرٍ وَنَهَانِي عَنْ نَقْرَةٍ كَنَقْرَةِ الدِّيكِ وَإِقْعَاءٍ كَإِقْعَاءِ الْكَلْبِ وَالْتِفَاتٍ كَالْتِفَاتِ الثَّعْلَبِ
हमसे [यह्या बिन आदम] हमसे [शारीक] से [यजीद बिन अबी जियाद] से [मुजाहिद] से [अबू हुरैरा] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मोहि तीन बातन का हुकुम दिहिन अऊर तीन बातन से मना किहिन; उइ मोका रोज दुइ रकात धुहा, सोवै से पहिले वितर अऊर हर महीना तीन दिन रोजा रखै का हुकुम दिहिन। अऊर मोका चुभन से मना किहिन - प्रार्थना मा - जइसे मुर्गी चुभत है, कुत्ता के तरह बैठत है अऊर भेड़िया के तरह मुड़ जात है'।