Imam Bukhari : 5779
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ سَهْلٍ قَالَكُنَّا نَفْرَحُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ قُلْتُ وَلِمَ قَالَ كَانَتْ لَنَا عَجُوزٌ تُرْسِلُ إِلَى بُضَاعَةَ قَالَ ابْنُ مَسْلَمَةَ نَخْلٍ بِالْمَدِينَةِ فَتَأْخُذُ مِنْ أُصُولِ السِّلْقِ فَتَطْرَحُهُ فِي قِدْرٍ وَتُكَرْكِرُ حَبَّاتٍ مِنْ شَعِيرٍ فَإِذَا صَلَّيْنَا الْجُمُعَةَ انْصَرَفْنَا وَنُسَلِّمُ عَلَيْهَا فَتُقَدِّمُهُ إِلَيْنَا فَنَفْرَحُ مِنْ أَجْلِهِ وَمَا كُنَّا نَقِيلُ وَلَا نَتَغَدَّى إِلَّا بَعْدَ الْجُمُعَةِ
हमसे कहिन है [अब्दुल्लाह बिन मसलमा] हमसे [इब्न अबू हाजिम] [अपने पिता] से [सहल] से कहिन हैं, उ कहिन; '-अतीत मा- जब शुक्रवार आवा तौ हम खुश महसूस किहेन, हम -अबू हजम- पूछेन; 'काहे?' साहल ने जवाब दिया; 'हमरे पास एक बूढ़ी दादी है। आमतौर पर उ बुडलाह जात है -इब्नू मसलामा कहिन; अर्थात् मदीना मा एक खजूर के बगीचा - फिर उ शकरकंद लिहिन अऊर ओनका अपने बर्तन मा रखिन अऊर गेहूं के दाना पीसिन। जुम्मा के नमाज के बाद हम उनसे मिले गये, हम नमस्कार किहिन, फिर दादी हमका परोसिन। यहिसे, शुक्रवार हमरे लिए बहुत रोमांचक दिन है। हम शुक्रवार के बाद के अलावा, दुपहरिया के खाना या कैलुला कबो नाहीं खात हैं - डलुहुर से पहिले झपकी लेत हैं।