इमाम अहमद : 6961
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمُهَجِّرُ إِلَى الْجُمُعَةِ كَالْمُهْدِي بَدَنَةً ثُمَّ الَّذِي يَلِيهِ كَالْمُهْدِي بَقَرَةً وَالَّذِي يَلِيهِ كَالْمُهْدِي كَبْشًا حَتَّى ذَكَرَ الدَّجَاجَةَ وَالْبَيْضَةَ
हमें [सुफ़यान], [अज़ ज़ुहरी], [सईद], [अबू हुरैरा] से पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बताया गया है, उन्होंने कहा: "जो व्यक्ति शुक्रवार की प्रार्थना में आने में जल्दबाजी करता है वह उस व्यक्ति की तरह है जिसने ऊंट में निवेश किया है, और जो व्यक्ति उसके बाद आता है वह उस व्यक्ति की तरह है जिसने गाय में निवेश किया है, और जो व्यक्ति उसके बाद आता है वह उस व्यक्ति की तरह है जिसने बकरी में निवेश किया है," तो उन्होंने कहा कि यह मुर्गियों और अंडों में निवेश करने जैसा था।