Imam Bukhari : 5696
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ عَنْ خَالِدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَأَثْنَى رَجُلٌ عَلَى رَجُلٍ عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ وَيْلَكَ قَطَعْتَ عُنُقَ أَخِيكَ ثَلَاثًا مَنْ كَانَ مِنْكُمْ مَادِحًا لَا مَحَالَةَ فَلْيَقُلْ أَحْسِبُ فُلَانًا وَاللَّهُ حَسِيبُهُ وَلَا أُزَكِّي عَلَى اللَّهِ أَحَدًا إِنْ كَانَ يَعْلَمُ
हमसे कहिन है [मूसा बिन इस्माइल] हमसे [वुहैब] [खालिद] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू बकराह] से [उनके पिता] से कहिन हैं उ कहिन; 'एक मनई रहा जे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने दूसर मनई के गुणन के तारीफ करत रहा, तौ उ कहिस: 'हाय तोहरे ऊपर, तू आपन भाई के गर्दन काट दिहिस'। -उन्होंने तीन बार कहा- अगर तुममें से कोई अपने दोस्त के तारीफ करत है -यह असंभव नहीं है- तो वह कहे: 'मैं सोचत हौं कि फलाना ई अऊर ई तरह है, अऊर अल्लाह एकर न्याय करिहैं, अऊर मैं अल्लाह के खिलाफ केहू का पवित्र नाहीं करत हउँ भले ही उ जानत हो'।