Imam Ahmad : 6283
حَدَّثَنَا حَسَنٌ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ حَدَّثَنَا أَبُو عُشَّانَةَ أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَمْرٍو يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ أَوَّلَ ثُلَّةٍ تَدْخُلُ الْجَنَّةَ لَفُقَرَاءُ الْمُهَاجِرِينَ الَّذِينَ يُتَّقَى بِهِمْ الْمَكَارِهُ وَإِذَا أُمِرُوا سَمِعُوا وَأَطَاعُوا وَإِذَا كَانَتْ لِرَجُلٍ مِنْهُمْ حَاجَةٌ إِلَى السُّلْطَانِ لَمْ تُقْضَ لَهُ حَتَّى يَمُوتَ وَهِيَ فِي صَدْرِهِ وَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يَدْعُو يَوْمَ الْقِيَامَةِ الْجَنَّةَ فَتَأْتِي بِزُخْرُفِهَا وَزِينَتِهَا فَيَقُولُ أَيْ عِبَادِي الَّذِينَ قَاتَلُوا فِي سَبِيلِي وَقُتِلُوا وَأُوذُوا فِي سَبِيلِي وَجَاهَدُوا فِي سَبِيلِي ادْخُلُوا الْجَنَّةَ فَيَدْخُلُونَهَا بِغَيْرِ حِسَابٍ وَلَا عَذَابٍ وَذَكَرَ الْحَدِيثَ
हमसे कहिस है [हसन] हमसे कहिस है [इब्न लहिआह] हमसे कहिस है [अबू उसिस्यानाह] कि उ [अब्दुल्लाह बिन अम्र] का कहत सुना है; हमने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुना: 'वास्तव मा, जवन लोगन के समूह सबसे पहिले स्वर्ग मा प्रवेश किहिन, उ मुहाजिरीन समूह रहे, जे मकरूह मामलन मा बहुत सावधान रहे। अगर ओनका आदेश दीन जात है, तौ उई सुनिहैं अऊर मानिहैं। अऊर अगर ओनमा से एक का शासक के प्रति इच्छा है, तौ ऊ इच्छा तब तक पूरी नाहीं होई जब तक कि ऊ मर न जाय अऊर - ऊ इच्छा - अबहियों ओकरे छाती मा जमा है। अऊर सचमुच, अल्लाह अज्जा वजल्ला क़ामत के दिन स्वर्ग का पुकारिहैं फिर उ सुंदरता अऊर अपने सब गहना के साथ आवै अऊर अल्लाह चिल्लाइहैं: 'हे मोर सेवक जे मोर राह मा लड़े हैं, अऊर मारे गए हैं, चोट पहुँचाए हैं, अऊर मोर रास्ते मा जेहाद लड़े हैं, बिना हिसाब-किताब के, बिना सजा के स्वर्ग मा प्रवेश करौ'। यहिसे उ हदीस का जिक्र किहिन।