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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 6033

حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَبْعَثُنَا فِي أَطْرَافِ الْمَدِينَةِ فَيَأْمُرُنَا أَنْ لَا نَدَعَ كَلْبًا إِلَّا قَتَلْنَاهُ حَتَّى نَقْتُلَ الْكَلْبَ لِلْمُرَيَّةِ مِنْ أَهْلِ الْبَادِيَةِ

हमसे कहिन है [अब्दुर्राज़ाक] हमसे [सुफयान] से [इस्माइल बिन उमय्या] से [नफी'] से [इब्न उमर] कहिन हैं; एक बार पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमका मदीना के कोने-कोने मा भेजिन, अऊर उ हमका निर्देश दिहिन कि जब तक कुकुरन का न मारैं तब तक कुत्तन का इजाजत न दीन जाय, जब तक कि हम बड़वी आबादी के दुधारू ऊंटन के रखवाली करै वाले कुत्ता का न मार दें।