Manusia bagaikan seratus unta tidak ada yang dapat ditunggangi
Imam Ahmad : 5771
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ وَيَعْقُوبُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي عَنِ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّمَا النَّاسُ كَالْإِبِلِ الْمِائَةِ لَا تَكَادُ تَجِدُ فِيهَا رَاحِلَةً وَقَالَ يَعْقُوبُ كَإِبِلٍ مِائَةٍ مَا فِيهَا رَاحِلَةٌ
हमसे कहिन है [सुलेमान] हमसे [इब्राहिम बिन सादरी] [अज जुहरी] से कहिन हैं अऊर [याकूब] उ कहिन, हमसे [मेरे पिताजी], [श्रीमती शिहाब] से [सलीम बिन अब्दिल्लाह] से कहिन हैं कि [अब्दुल्ला बिन उमर] कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहते सुना: 'इंसान का दृष्टान्त सौ ऊँट के समान है, एक भी नहीं मिलता जो सवारी लायक हो। याकूब कहिन; 'सौ ऊंट के तरह, ओनमा से एकौ वाहन के रूप मा उपयोग करै लायक नाहीं है'।