इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 5727

حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ ابْنِ إِسْحَاقَ حَدَّثَنِي أَبِي إِسْحَاقُ بْنُ يَسَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قَيْسِ بْنِ مَخْرَمَةَ قَالَ أَقْبَلْتُ مِنْ مَسْجِدِ بَنِي عَمْرِو بْنِ عَوْفٍ بِقُبَاءَ عَلَى بَغْلَةٍ لِي قَدْ صَلَّيْتُ فِيهِ فَلَقِيتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ مَاشِيًا فَلَمَّا رَأَيْتُهُ نَزَلْتُ عَنْ بَغْلَتِي ثُمَّ قُلْتُ ارْكَبْ أَيْ عَمِّ قَالَ أَيْ ابْنَ أَخِي لَوْ أَرَدْتُ أَنْ أَرْكَبَ الدَّوَابَّ لَرَكِبْتُ وَلَكِنِّي رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَمْشِي إِلَى هَذَا الْمَسْجِدِ حَتَّى يَأْتِيَ فَيُصَلِّيَ فِيهِ فَأَنَا أُحِبُّ أَنْ أَمْشِيَ إِلَيْهِ كَمَا رَأَيْتُهُ يَمْشِي قَالَ فَأَبَى أَنْ يَرْكَبَ وَمَضَى عَلَى وَجْهِهِ

हमसे कहिस है [याकूब] हमसे कहिस है [मेरे पिता], [इब्न इशाक] से कहिस है कि मोर पिता [इशाक बिन यासर] से [अब्दुल्ला बिन कैस बिन मखरमह] उ कहिन; मैं कुबा के बानी अम्र बिन औफ मस्जिद से अपने खच्चर पर सवार होइके घरे आवा रहा। मस्जिद मा नमाज पढ़ै के बाद, हम [अब्दुल्ला बिन उमर] से मिलेन, जे चलत रहा। जब ओका देखेन तौ खच्चर से उतरि कै अर्पित किहेन कि चलो, हे मामा! उ जवाब दिहिस, 'हे मोर भतीजा, अगर मैं एक वाहन लेय चाहत रहौं तौ मैं चलावत रहौं, लेकिन मैं वास्तव मा रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का ई मस्जिद तक पैदल जात देखे रहौं जब तक कि उ नाहीं आवा अऊर नमाज नाहीं पढ़ा। यहिसे मैं यहि मस्जिद तक पैदल जाय का पसंद करत हौं काहे से कि मैं ओका चलत देखे रहेंव'। -अब्दुल्ला बिन कैस- कहिन, 'इबनू उमर फिर भी वाहन मा चढ़ै से मना कइ दिहिन अऊर आगे बढ़ै के जल्दी किहिन'।