Imam Ahmad : 5684
حَدَّثَنَا أَسْوَدُ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ سَمِعْتُ سَلَمَةَ بْنَ كُهَيْلٍ يَذْكُرُ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي لَأَعْلَمُ شَجَرَةً يُنْتَفَعُ بِهَا مِثْلَ الْمُؤْمِنِ هِيَ الَّتِي لَا يُنْفَضُ وَرَقُهَا قَالَ ابْنُ عُمَرَ أَرَدْتُ أَنْ أَقُولَ هِيَ النَّخْلَةُ فَفَرِقْتُ مِنْ عُمَرَ ثُمَّ سَمِعْتُهُ بَعْدُ يَقُولُ هِيَ النَّخْلَةُ
हमसे कहिस है [असवाद] हमसे कहिस है [शरीक] हम [सलामा बिन कुहैल] का [मुजाहिद] से [इब्न उमर] से बतावत सुने रहेन उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहुअलेहि व सल्लम एक बार कहिन रहैं: 'जहाँ तक हम जानित है कि एक पेड़ है जेका एक मुमिन के तरह इस्तेमाल कीन जा सकत है। ऊ पेड़ कबहूँ आपन पत्ता नाहीं गिरावत है।' इब्न उमर ने कहा, 'मैं कहना चाहता था कि पेड़ खजूर का है, केवल मैं उमर से डरता था। फिर वहिके बाद हम ओनका कहत सुनेन, 'वह पेड़ खजूर है।'