Imam Ahmad : 5403
حَدَّثَنَا أَبُو النَّضْرِ حَدَّثَنَا شَرِيكٌ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ إِسْحَاقَ عَنْ أَبِي صَالِحٍ الْحَنَفِيِّ عَنْ رَجُلٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ ابْنَ عُمَرَ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ مَثَّلَ بِذِي رُوحٍ ثُمَّ لَمْ يَتُبْ مَثَّلَ اللَّهُ بِهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ
हमसे कहा गा है [अबू अन-नदलर] ने हमसे [स्यारिक] [मुआविया बिन इशाक] से, [अबू सलीह अल-हनफी] से, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एक दोस्त से कहा है कि [इब्न उमर] ने कहा: हमने सुना है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लाम का एक चित्र रहा: जीवित प्राणी अऊर फिर पश्चाताप नाहीं करत है, क़यामत के दिन अल्लाह ओका ओसे तुलना करिहैं जेसे उ खींचा रहा'।